
NEET UG: जापान बन रहा भारतीय छात्रों के लिए नया मेडिकल डेस्टिनेशन, जानें कारण
AajTak
जापान छात्र सेवा संगठन (JASSO) के अनुसार, 2023 में 279,274 अंतर्राष्ट्रीय छात्र थे, जो 2022 से 20.8% की वृद्धि दर्शाता है. जापान, उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा, विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित चिकित्सा कार्यक्रम और स्वास्थ्य सेवा में बढ़ते अवसरों की पेशकश करते हुए एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभरा है.
जापान छात्र सेवा संगठन (JASSO) के मुताबिक, 2023 में जापान में 2,79,274 विदेशी छात्र पढ़ रहे थे, जो 2022 से लगभग 21% ज्यादा थे. मई 2024 तक ये संख्या बढ़कर 3,36,708 हो गई, यानी फिर से 21% की बढ़त हुई. भारत में मेडिकल (MBBS) में एडमिशन के लिए NEET-UG नाम की राष्ट्रीय परीक्षा होती है. हर साल लाखों स्टूडेंट्स इसमें बैठते हैं, लेकिन सीटें बहुत कम होती हैं. 2025 में इस एग्जाम में 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया. इसी वजह से MBBS भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले कोर्स में से एक है.
लेकिन, इतनी ज्यादा प्रतिस्पर्धा और सीटों की कमी की वजह से कई छात्र विदेश में मेडिकल पढ़ाई के बारे में सोचते हैं. पहले स्टूडेंट्स ज्यादातर पूर्वी यूरोप, रूस और पश्चिम एशिया के देशों को चुनते थे, लेकिन अब नए विकल्प भी सामने आ रहे हैं. इन्हीं में से एक है जापान, जो अब बेहतरीन क्वालिटी की पढ़ाई, दुनियाभर में मशहूर मेडिकल प्रोग्राम और हेल्थ सेक्टर में अच्छे करियर अवसर देने की वजह से, एक बढ़िया विकल्प बन गया है. अब आगे हम जानेंगे कि जापान में मेडिकल पढ़ाई करने के लिए भारतीय छात्रों को क्या-क्या ज़रूरी चीज़ें और शर्तें पूरी करनी होती हैं.
जापान में छात्रों के लिए वीज़ा नीति जापान में पढ़ाई करने के लिए सबसे पहले जिस कॉलेज या यूनिवर्सिटी में आपका एडमिशन हुआ है, वहां से पात्रता प्रमाणपत्र (COE) लेना पड़ता है. यह मिलने के बाद, अपने नज़दीकी जापानी दूतावास या वाणिज्य दूतावास में स्टूडेंट वीज़ा के लिए अप्लाई करना होता है. वीजा की अवधि आपके कोर्स के हिसाब से होती है, यह 1 साल से लेकर 4 साल तक हो सकता है.
वीज़ा पाने के लिए आपको यह साबित करना होगा कि आपके पास ट्यूशन फीस और रहने के खर्च के लिए पर्याप्त पैसे हैं, चाहे वह आपकी अपनी बचत हो या स्पॉन्सरशिप. जापान पहुंचने के बाद, आपको रेजिडेंट कार्ड बनवाना और नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस में रजिस्टर करना होता है. यह इंश्योरेंस लगभग 70% मेडिकल खर्च कवर करता है और इसकी मासिक फीस किफायती है, करीब 1,800-2,000 येन (₹1,100-1,200).
जापान में मेडिकल कोर्स और स्पेशलाइजेशन की मांग जापान में अभी भी 6 साल का MD कोर्स (भारत के MBBS जैसा) सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, लेकिन अब अंग्रेज़ी में पढ़ाए जाने वाले कोर्स भी बढ़ रहे हैं. पारंपरिक मेडिकल विषयों के साथ-साथ ग्लोबल हेल्थ, पब्लिक हेल्थ और बायोमेडिकल साइंस जैसे नए कोर्स भी पसंद किए जा रहे हैं. जापान की बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण जेरिएट्रिक नर्सिंग, पैलिएटिव केयर, डिजिटल हेल्थ और बायोइनफॉर्मेटिक्स जैसे क्षेत्रों में भी मांग बढ़ी है. कुछ यूनिवर्सिटीज, जैसे Keio University, हेल्थकेयर मैनेजमेंट और नर्स प्रैक्टिशनर प्रोग्राम भी चला रही हैं, जो मेडिकल स्किल्स के साथ लीडरशिप ट्रेनिंग भी देते हैं.
2026 में कक्षा 12 के स्नातकों के लिए आदर्श आवेदन समय-सीमा फरवरी या मार्च 2026 में 12वीं कक्षा पूरी करने वाले और जापान में एमबीबीएस करने का लक्ष्य रखने वाले छात्रों को पहले NEET UG 2026 परीक्षा देनी होगी, क्योंकि अधिकांश जापानी विश्वविद्यालयों में भारतीय आवेदकों के पास वैध NEET योग्यता होना आवश्यक है. अगर वे 2026 में भी NEET पास कर लेते हैं, तो भी जापान में प्रवेश की सबसे जल्दी संभव तिथि अप्रैल 2027 है.

उत्तर कोरिया के हालिया चुनावों में किम जोंग उन को लगभग 100% के करीब वोट मिले, जिसने दुनियाभर का ध्यान खींच लिया. जहां ज्यादातर लोकतंत्रों में कड़ी टक्कर देखने को मिलती है, वहीं इतने एकतरफा नतीजों ने सोशल मीडिया पर बहस और मीम्स की बाढ़ ला दी. लोग इन आंकड़ों को लेकर मजाक करते नजर आए और इसे '100 में 100 नंबर' जैसा रिजल्ट बताया.

Honda ने भारतीय बाजार में अपनी अपकमिंग इलेक्ट्रिक कार की टेस्टिंग को शुरू कर दिया है. कंपनी ने पिछले साल इस कार का कॉन्सेप्ट दिखाया था. जीरो अल्फा को भारत के लिए तैयार किया जा रहा है. इस इलेक्ट्रिक SUV को टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया है. इसमें कार से जुड़ी कुछ खास जानकारियां भी सामने आई हैं. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.











