
India Vs England: इंग्लैंड में द्रविड़-सचिन-सौरव का वो 'तांडव', जिसकी कहानी पढ़ एजबेस्टन की हार भूल जाएंगे
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भारत का स्कोर 500 के पार हो चुका था. आख़िरी सेशन शुरू हो चुका था. सचिन 150 के पार खेल रहे थे और सौरव गांगुली अपने शतक से बस कुछ ही दूर थे. अम्पायर अशोक डिसिल्वा और डेविड ऑर्चर्ड ने अपने लाइट-मीटर निकाले और पाया कि मैदान में रोशनी कुछ कम थी. उन्होंने बल्लेबाज़ों को ऑफ़र दिया कि वो पवेलियन जा सकते थे और खेल को रोक दिया जाता.
2002 में भारतीय टीम नेटवेस्ट ट्रॉफ़ी जीत चुकी थी. सौरव गांगुली लॉर्ड्स की बालकनी में टीशर्ट लहरा चुके थे. टेस्ट मैचों की सीरीज़ शुरू हो चुकी थी और जॉन राइट और सौरव गांगुली की जोड़ी ने भारतीय क्रिकेट को तोहफ़ा दिया - सहवाग को टेस्ट मैच में ओपनिंग दी गयी. सहवाग ने लॉर्ड्स में 84 और नॉटिंघम में 106 रन बनाये. लेकिन इन दोनों मैचों में भारतीय टीम जीत का मुंह नहीं देख सकी. 2 मैचों के बाद 1-0 की स्थिति बनी हुई थी. लॉर्ड्स में खेले गए पहले मैच में इंग्लैण्ड ने इंडिया को 170 रनों से हराया. हालांकि अजीत अगरकर के लिये ये मैच स्पेशल रहा क्यूंकि इस मैच की वजह से ही उनका नाम लॉर्ड्स में बल्लेबाज़ी वाले ऑनर बोर्ड पर चढ़ा. उन्होंने दूसरी पारी में 190 गेंदों में 109 रन बनाये और नाबाद रहे. दूसरे मैच में भारतीय टीम ने सहवाग के शतक के चलते साढ़े तीन सौ से कुछ ज़्यादा रन बनाये. लेकिन फिर इंग्लैण्ड ने 617 रन बनाये और इसके जवाब में इंडिया ने अच्छी बल्लेबाज़ी करते हुए मैच ड्रॉ करवा लिया. द्रविड़ ने शतक लगाया और सचिन, गांगुली नाइनटीज़ में आउट हुए.
तीसरा मैच हेडिंग्ली में खेला जाना था. मैच से दो दिन पहले ज्योफ़्री बॉयकॉट ने भारतीय टीम को अपने घर खाने पर बुलाया था. बॉयकॉट ने भारतीय टीम से हेडिंग्ली में खेल की रणनीति के बारे में भी बात की. लेकिन जब उन्होंने देखा कि टॉस जीतकर सौरव गांगुली ने पहले बल्लेबाज़ी चुन ली, उन्होंने अपना सर पकड़ लिया. हेडिंग्ली में इतने बादल थे कि ऐसा लग रहा था कि मैच की शुरुआत ही कृत्रिम लाइट में होगी. ठण्डे मौसम में ऐसा माहौल इंग्लैण्ड के गेंदबाज़ों को हमेशा रास आता है. ऐसे में उन्हें गेंदबाज़ी करने का न्योता देना आत्मघाती फैसला मालूम देता है.
हर कोई इसे बहुत बड़ी ग़लती बता रहा था. लेकिन इस फ़ैसले के पीछे की वजह बहुत ही कम लोगों को मालूम थी. असल में ये एक जुआ था जो भारतीय थिंक टैंक ने खेला था. राहुल द्रविड़ इसके पीछे के सबसे बड़े ट्रिगर थे. द्रविड़ का ये मानना था कि भारतीय टीम अपने स्पिनरों का असली खेल नहीं होने दे रही थी. तेज़ गेंदबाज़ी के चलते भारत दूसरी पारी में बल्लेबाज़ी करना प्रेफ़र कर रहा था और स्पिनरों को 5वें दिन का विकेट नहीं मिल रहा था. द्रविड़ का कहना था कि अगर पांचवें दिन इंग्लैण्ड को 200 रन चेज़ करने हों तो भारतीय स्पिनर उनके लिये बहुत बड़ी मुश्किल पैदा कर सकते थे.
इसके चलते टीम ने फैसला किया कि वो पहले बल्लेबाज़ी करेंगे. इस स्ट्रेटेजी के लिये टीम के कॉम्बिनेशन को भी बदला गया. हरभजन और कुम्बले, दोनों स्पिनरों को जगह मिली. इसके चलते आशीष नेहरा को बाहर जाना पड़ा. साथ ही वसीम जाफ़र को भी बाहर किया गया और उनकी जगह ओपनिंग के लिये संजय बांगर आये. बांगर के साथ अच्छी बात ये भी थी कि एक पेसर की ग़ैर मौजूदगी में वो हाथ घुमा सकते थे.
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पहला झटका और फिर अनुशासन - शुरुआत, जो किले की नींव बनी

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