
England Cricket Team World Champions: जो दूसरे सोच नहीं सकते वो इग्लैंड ने कर दिखाया, ऐसे जीता दो-दो वर्ल्ड कप, जानें पूरी कहानी
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पिछले 5-10 सालों में इंग्लैंड की टीम लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में एक महाशक्ति के रूप में उभरी है. इंग्लैंड ने पहले साल 2019 का वनडे वर्ल्ड कप जीता. अब हाल ही में उसने टी20 वर्ल्ड कप पर भी कब्जा जमा लिया. इंग्लैंड की कामयाबी के पीछे इयोन मॉर्गन, एंड्रयू स्ट्रास, मैथ्यू मॉट जैसे लोगों का अहम रोल रहा है.
बीते रविवार को इंग्लैंड ने पाकिस्तान को हराया और क्रिकेट की दुनिया को टी-20 फॉर्मेट का नया चैम्पियन मिला. इंग्लैंड ने दूसरी बार ट्रॉफ़ी उठायी और बीते 3 सालों में हुए 3 में से 2 विश्व कप जीत लिये. 2015 के ODI विश्व कप में ये टीम नॉकआउट स्टेज में भी नहीं पहुंची थी. और यहां जो मैच हुए उसमें इंग्लैंड को छोटी-मोटी हार नहीं मिलीं. न्यूज़ीलैंड ने उन्हें 8 विकेट से हराया. ऑस्ट्रेलिया ने 111 रनों से. श्रीलंका ने तो 1 ही विकेट खोकर 300 के ऊपर का टार्गेट चेज़ कर डाला. अगले साल इस टीम ने टी-20 विश्व कप का फ़ाइनल खेला. यहां उसे आख़िरी ओवर में हार मिली. यहां से इंग्लिश क्रिकेट की मनोवृत्ति में बड़ा बदलाव आता दिखा.
स्ट्रॉस ने इंग्लिश क्रिकेट में लाया सुधार
सबसे पहला अच्छा काम हुआ एंड्रयू स्ट्रॉस का आना. स्ट्रॉस ने इंग्लैंड के क्रिकेट को मैदान पर बहुत कुछ दिया. और फिर जब वो इंग्लैंड क्रिकेट के डायरेक्टर बनकर आये तो अपने साथ नयी और अनोखी चीज़ें लाये. स्ट्रॉस को दिख रहा था कि टेस्ट क्रिकेट को तवज्जो मिलने के कारण इंग्लैंड का सीमित ओवरों का क्रिकेट पीछे रह रहा था. खिलाड़ियों पर भी रेड बॉल का अच्छा खिलाड़ी बनने का दबाव था. उन्होंने 'व्हाइट-बॉल कॉन्ट्रैक्ट' की शुरुआत की. अब सीमित ओवर के खिलाड़ियों को छूट थी कि वो अपने खेल पर फ़ोकस करें. इन खिलाड़ियों को कितना पैसा मिलना था, ये उनकी परफॉरमेंस के आधार पर मिलने वाली रैकिंग पर आधारित होना था. इससे मैदान में गेंद को पीटने वाले बल्लेबाज़ों की बढ़िया फसल पनपनी तैयार हुई. जेसन रॉय, मलान, एलेक्स हेल्स, टॉम कुरेन, जॉर्डन आदि खिलाड़ी इन्हीं कॉन्ट्रैक्ट्स के बूते आगे बढ़े और दुनिया ने उन्हें देखा.
2015 के बाद सभी बड़ी टीमों के आंकड़ों को देखें तो 2019 विश्व-कप की जीत तक जीत-हार के अनुपात में इंग्लैंड (भारत के बाद) दूसरे नम्बर पर था. जीत और हार के बीच अंतर बढ़ा ताबड़तोड़ क्रिकेट की बदौलत. इसके लिये इंग्लिश क्रिकेट का बहुत बड़ा हिस्सा ट्रेवर बेलिस को क्रेडिट देता है. 2019 के विश्व कप तक इंग्लैंड की टीम में ऐसे खिलाड़ी आये जिनकी बदौलत 9 नंबर तक के खिलाड़ी बल्ला घुमा सकते थे. भारत समेत कई बड़ी टीमें 7 नंबर के बाद नील बटे सन्नाटा हो जाती हैं. यही वजह है कि इंग्लैंड की टीम को कई मौकों पर बहुत बड़े स्कोर बनाते देखा गया. 2015 के बाद से अगले वनडे वर्ल्ड कप तक, रन-रेट के मामले में 6.29 रन प्रति ओवर के साथ इंग्लैण्ड सबसे ऊपर रहा.
मैथ्यू मॉट बतौर कोच कर रहे कमाल

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