
Ajinkya Rahane: जब अंपायर्स ने दिया भारतीय टीम को खेल छोड़ने का सुझाव, रहाणे ने सुनाई पूरी कहानी
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टीम इंडिया के पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर सिडनी टेस्ट के दौरान काफी विवाद हुआ था. उस मुकाबले में दर्शकों ने मोहम्मद सिराज और जसप्रीत बुमराह पर नस्लीय टिप्पणी की थी.
साल 2020-21 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर अजिंक्य रहाणे की अगुवाई में भारतीय टीम ने 2-1 से टेस्ट सीरीज पर कब्जा किया था. वैसे, उस दौरे पर सिडनी में खेला गया टेस्ट मैच काफी सुर्खियों में रहा. ड्रॉ पर समाप्त हुए सिडनी टेस्ट में तेज गेंदबाजों मोहम्मद सिराज और जसप्रीत बुमराह पर दर्शकों ने नस्लीय टिप्पणी की थी.
गौरतलब सिडनी टेस्ट में तीसरे दिन का खेल समाप्त होने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने मैच अधिकारियों से नस्लीय टिप्पणी को लेकर बात की थी. जब यह अगली सुबह जारी रहा, तो भारतीयों ने अंपायर्स फिर शिकायत की. उस चौथे दिन खेल दस मिनट तक रुका रहा. खेल तभी शुरू हो पाया था, जब लोगों के एक समूह को स्टैंड्स से बाहर किया गया.
अब अजिंक्य रहाणे ने सिडनी टेस्ट को लेकर खुलासा किया है कि अंपायर्स पॉल राइफेल और पॉल विल्सन ने भारतीय खिलाड़ियों को ड्रेसिंग रूम में वापस जाने के लिए कहा था, अगर वे खेलना नहीं चाहते थे. लेकिन भारत ने दर्शकों को मैदान से बाहर निकालने और टेस्ट जारी रखने पर जोर दिया.
उस सीरीज पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'बंदों में है दम' की लॉन्चिंग के मौके पर रहाणे ने कहा, 'जब सिराज चौथे दिन फिर से मेरे पास आए तो मैंने अंपायरों से कहा कि हम तब तक नहीं खेलेंगे, तबतक वह मामले पर एक्शन नहीं लेते हैं. इस पर अंपायरों ने कहा कि आप खेल को रोक नहीं सकते हैं और आप चाहें तो बाहर जा सकते हैं. हमने कहा कि हम यहां खेलने के लिए आए हैं ,ड्रेसिंग रूम में बैठने के लिए नहीं. यह महत्वपूर्ण था कि जिस स्थिति से वह गुजरे थे, उसे देखते हुए हम उनका सपोर्ट करे. सिडनी में जो हुआ वह पूरी तरह से गलत था.'
अश्विन ने कही ये बात
अश्विन ने सिडनी टेस्ट मैच को लेकर कहा, 'व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि एडिलेड और मेलबर्न उतने बुरे नहीं थे. लेकिन सिडनी में यह लगातार होता रहा है. मैंने भी इसका अनुभव किया है. मुझे नहीं लगता कि इसका किसी खास देश के लोगों के एक विशेष वर्ग से कोई लेना-देना है. मुझे लगता है कि नस्लवाद इसका एक छोर है, जहां लोग मानते हैं कि यह किसी के साथ भेदभाव का एक तरीका है. नस्लवाद ऐसी चीज है जिसकी निंदा करनी चाहिए. हर जगह लोग अलग-अलग आधार पर लोगों को बांटने का काम कर रहे हैं, जो सही नहीं है.'

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