
सिर्फ अल-फलाह नहीं...बिना NAAC एक्रेडिटेशन के चल रहे हैं कई यूनिवर्सिटीज
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अल-फलाह यूनिवर्सिटी नैक एक्रेडिटेशन खत्म होने के बाद भी ए ग्रैड यूनिवर्सिटी होने का दावा करती थी. दिल्ली ब्लास्ट के बाद जब विश्वविद्यालय से जुड़ी जांच शुरू हुई तो पता चला कि इसकी नैक ग्रेडिंग की वैलिडिटी खत्म हो चुकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अल-फलाह यूनिवर्सिटी ऐसा अकेला संस्थान है. अगर नहीं, तो बिना एक्रेडिटेशन के चलने वाले संस्थानों के साथ क्या होता है, क्या ऐसे संस्थानों की कोई लिस्ट होती है, जिससे इनकी पहचान की जा सके.
दिल्ली धमाकों के बाद, फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी एंटी-टेरर एक्टिविटीज़ को पनाह देने के आरोप में जांच के दायरे में आ गई है. NIA की जांच में पाया गया है कि यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के भेष में आतंकवादी फैकल्टी के तौर पर काम कर रहे थे.
जब इस संस्थान से जुड़ी ऐसी खबरों चल रही थी. तब नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) भी एक्टिव हुआ. नैक ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को ऐसे संस्थान के तौर पर चिह्नित किया जो A ग्रेड यूनिवर्सिटी होने का दावा करती है, लेकिन 2018 में ही उसका एक्रेडिटेशन खत्म हो गया था.
बिना नैक ग्रेड के चल रहे कई संस्थान हालांकि,ए ग्रेड यूनिवर्सिटी के दावों के साथ बिना एक्रिडेशन के चलने वाली अल-फलाह यूनिवर्सिटी अकेली नहीं है. पार्लियामेंट में पेश किए गए सरकारी डेटा से पता चलता है कि कई भारतीय यूनिवर्सिटी और हजारों कॉलेज अभी भी बिना वैलिड NAAC ग्रेड के चल रहे हैं.
इतने यूनिवर्सिटीज को मिला है एक्रिडिटेशन शिक्षा मंत्रालय के AISHE सर्वे के डेटा के मुताबिक, 8 जुलाई, 2023 तक भारत में 690 यूनिवर्सिटी और 34000 से ज़्यादा कॉलेज NAAC एक्रेडिटेशन के साथ काम कर रहे थे. UGC से मिली जानकारी के मुताबिक, 1,113 यूनिवर्सिटी और 43,796 कॉलेजों में से NAAC ने 418 यूनिवर्सिटी और 9,062 कॉलेजों को एक्रेडिटेशन दिया है.
लोगों को गुमराह करने पर वापस हो सकता है एक्रेडिटेशन अल-फलाह का केस शायद उन कुछ मामलों में से एक है, जहां NAAC ने किसी यूनिवर्सिटी को NAAC एक्रेडिटेशन के लिए अप्लाई न करने पर पब्लिकली फ़्लैग किया है. क्योंकि उसकी एक्सपायरी हो गई थी. NAAC ने चेतावनी के तौर पर एक “कॉशनरी नोट” जारी किया था - NAAC से मान्यता प्राप्त संस्थान, अगर गुमराह करने वाले पाए जाते हैं या अपने एक्रेडिटेशन स्टेटस के बारे में जनता और छात्रों को गुमराह करने के लिए गलत जानकारी देते हैं, तो उन पर कार्रवाई हो सकती है, जिसमें एक्रेडिटेशन वापस लेना भी शामिल है.
झूठे एक्रेडिटेशन का दावा करने वाले संस्थानों की नहीं है कोई लिस्ट अल-फलाह मामले के अलावा, NAAC झूठे एक्रेडिटेशन दावों के लिए सज़ा पाए गए संस्थानों की पूरी लिस्ट पब्लिश नहीं की है. मीडिया सर्च से सिर्फ़ कुछ ही रेफरेंस मिलते हैं. यह अस्पष्टता अपने आप में एक लूपहोल है. छात्र और माता-पिता आसानी से यह नहीं देख सकते कि NAAC लेबल का गलत इस्तेमाल करते हुए कौन पकड़ा गया है.

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