
देवउठनी एकादशीः कहानी उस नदी की जिसमें पत्थर रूप में पड़े मिलते हैं शापित भगवान विष्णु... गंडकी नदी और शालिग्राम का पौराणिक कनेक्शन
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शालिग्राम पूजा सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो भगवान विष्णु के विग्रह स्वरूप माने जाते हैं. गंडकी नदी, जो नेपाल से निकलती है, शालिग्राम शिलाओं का स्रोत है और इसकी पवित्रता को कई पुराणों और भक्ति काव्यों में वर्णित किया गया है.
सनातन परंपरा में भगवान शालिग्राम की पूजा का खास महत्व है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शालिग्राम ही जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु का विग्रह स्वरूप हैं. ये काले रंग के गोल चिकने पत्थर के स्वरूप में होते हैं. इन्हीं के साथ तुलसी जी का विवाह हुआ है. सनातन परंपरा को मानने वाले ज्यादातर लोगों के पूजा स्थान पर शालिग्राम जी स्थापित होते हैं.
मान्यता है कि जिन घरों में नियम पूर्वक शालिग्राम जी की पूजा की जाती है, वहां पर हमेशा भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है. इन्हें घर में रखकर नियमित रूप से पूजा करने से आपको कई तरह की परेशानियों से निजात मिलती है. साथ ही घर में सुख-समृद्धि आती है.
कहां पाए जाते हैं भगवान शालिग्राम? भगवान विष्णु का शालिग्राम स्वरूप सिर्फ नेपाल में बहने वाली गंडकी नदी के तल में ही पाए जाते हैं. यहां पर सालग्राम नामक स्थान पर भगवान विष्णु का मंदिर है, जहां उनके इस रूप का पूजन होता है, कहा जाता है कि इस ग्राम के नाम पर ही उनका नाम शालिग्राम पड़ा. गंडकी नदी,को बड़ी गंडक या केवल गंडक भी कहा जाता है. इस नदी को नेपाल में सालिग्रामि या सालग्रामी और मैदानों मे नारायणी और सप्तगण्डकी कहते हैं. महाकाव्यों में उल्लिखित सदानीरा भी यही है. स्कंदपुराण में भी इस नदी का उल्लेख सदानीरा और पवित्र जल से भरी रहने वाली नदी के तौर पर हुआ है.
गंडकी नदी के कई नाम यह नदी भारत में गंगा की बाईं सहायक नदी है.इसे कृष्णा गंडकी भी कहा जाता है. गंडकी नदी की पांच मुख्य सहायक नदियां हैं, दरौंदी, सेती, मादी, मार्स्यांडी और बूढ़ी गंडकी. गंडकी नदी का काली और त्रिशूली नदियों के संगम से मिलकर बनी है. ये दोनों नदियां नेपाल की महान हिमालय श्रृंखला से निकलती हैं. इस संगम से लेकर भारत की सीमा तक इस नदी को नारायणी नदी कहा जाता है. यह नदी दक्षिण-पश्चिम दिशा में भारत में प्रवेश करती है और फिर बिहार-उत्तर प्रदेश की सीमा के साथ दक्षिण-पूर्व की ओर बहती हुई 765 किलोमीटर की यात्रा तय कर गंगा नदी में पटना के सामने आकर मिल जाती है.
पुराणों में है गंडकी नदी का महत्व इस गंडकी नदी को पुराणों में गंगा की तरह ही स्त्री और देवी रूप में स्वीकार किया गया है और विष्णु भगवान का जो पतित पावन नाम है, वह इसी नदी के कारण मिलता है. पुराणों में वर्णन है कि गंडकी असल में एक गणिका था. प्राचीन काल में गणिका वैश्या का ही एक प्रकार हुआ करता था और यह गीत-संगीत, कला आदि में निपुण हुआ करती थीं.

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