
ईरान प्रोटेस्ट में पहली फांसी... खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने वाले 26 साल के इरफान को दी जाएगी सजा-ए-मौत
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ईरान में सरकार विरोधी एंटी-खामेनेई प्रदर्शनों से जुड़े एक मामले में 26 वर्षीय इरफान सुल्तानी को फांसी देने की तैयारी की खबर है, जिसे मौजूदा देशव्यापी आंदोलन से जुड़ी पहली फांसी बताया जा रहा है. सुल्तानी को 8 जनवरी को तेहरान के पास कराज में प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को उसकी फांसी तय है.
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े एक मामले में पहली बार फांसी की सजा दिए जाने की तैयारी की खबर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 26 साल के इरफान सुल्तानी को जल्द फांसी दी जा सकती है. बताया जा रहा है कि यह मौजूदा देशव्यापी एंटी-खामेनेई प्रदर्शनों से जुड़ी पहली फांसी होगी.
इरफान सुल्तानी तेहरान के पास कराज इलाके के फर्दीस का रहने वाला है. उसे 8 जनवरी को सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसकी फांसी बुधवार को तय की गई है.
मौजूदा आंदोलन में फांसी का पहला मामला
अब तक ईरान में विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए मौत की सजा का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन ज्यादातर मामलों में लोगों को गोली मारकर मारा गया. मौजूदा आंदोलन के दौरान फांसी की सजा का यह पहला मामला बताया जा रहा है. इजरायल और अमेरिका से जुड़े न्यूज आउटलेट Jfeed ने दावा किया है कि सुल्तानी का मामला फास्ट-ट्रैक फांसियों के एक नए सिलसिले की शुरुआत हो सकता है, जिसका मकसद आगे किसी भी विरोध प्रदर्शन को रोकना है.
मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
नॉर्वे में रजिस्टर्ड कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (Hengaw Organisation for Human Rights) ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. संगठन का कहना है कि पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई. लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी मारियो नॉफल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह फांसी कई और फांसियों की शुरुआत हो सकती है और सरकार डर के जरिए लोगों को काबू में रखना चाहती है.

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