
अमेरिका को कांटे की तरह चुभता रहा क्यूबा, ट्रंप तोड़ेंगे 11 राष्ट्रपतियों की नाकामी का सिलसिला?
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क्यूबा पिछले छह दशकों से अमेरिका को सीधे चुनौती दे रहा है. कोल्ड वॉर के दौर में अमेरिका ने इस देश पर अपने नियंत्रण के लिए नाकाबंदी, हमले, फिदेल कास्त्रो की हत्या की कोशिशें, सब कुछ किया. लेकिन अटलांटिक महासागर का द्विपीय देश क्यूबा अपने एजेंडे पर कायम रहा और अमेरिका की छाती में नश्तर की तरह चुभता रहा.
अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को चेतावनी दी कि वह 'बहुत देर होने से पहले अमेरिका के साथ समझौता कर ले'. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, 'मार्को रुबियो क्यूबा के राष्ट्रपति होंगे'. ट्रंप ने इसे शेयर करते हुए लिखा, 'यह सुनने में अच्छा लग रहा है' (Sounds good to me!). विदेश मंत्री मार्को रुबियो का ‘क्यूबा का राष्ट्रपति’ बनना उन्हें 'अच्छा आइडिया लगता है'. जाहिर है कि इस तरह की बातें करके अमेरिकी राष्ट्रपति क्यूबा को खुलकर धमकी दे रहे हैं. पर सवाल यह है कि क्या क्यूबा ट्रंप के लिए वेनेजुएला की तरह आसान निशान बनेगा?
कास्त्रो और क्यूबा
1 जनवरी 1959 को फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में यहां के लोगों ने अमेरिका समर्थित तानाशाह फुलगेन्सियो बतिस्ता को देश छोड़ने को मजबूर कर दिया. कास्त्रो ने शासन में आने के बाद अमेरिकी कंपनियों की जमीनें और कारखाने राष्ट्रीयकृत कर दिए. अमेरिका को लगा कि यह उसके पिछवाड़े में कम्युनिस्ट खतरा है. जवाब में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने 1960 में आर्थिक नाकाबंदी (embargo) कर दी, जो आज तक (2026 में भी) जारी है . दुनिया की सबसे लंबी चलने वाली नाकाबंदी. अमेरिका ने सोचा कि कुछ महीनों में क्यूबा की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी, लोग भूखे मरेंगे और कास्त्रो गिर जाएगा. लेकिन क्यूबा ने जवाब दिया . सोवियत संघ से हाथ मिलाया. सोवियत संघ ने चीनी और अन्य जरूरतों की भरपाई की. क्यूबा ने कहा कि हम भूखे मरेंगे, लेकिन झुकेंगे नहीं. क्यूबा के राष्ट्रपति अपनी प्राकृतिक मौत ही मरे.
बे ऑफ पिग्स (1961): अमेरिका की सबसे बड़ी शर्मिंदगी
अप्रैल 1961 में CIA ने क्यूबाई निर्वासितों (exiles) को प्रशिक्षित करके बे ऑफ पिग्स पर हमला करवाया. लेकिन क्यूबाई सेना ने 72 घंटे में हमलावरों को नेस्तनाबूद कर दिया. 1,200 से ज्यादा अमेरिकी समर्थित सैनिक कैद हो गए. कास्त्रो ने दुनिया को दिखाया कि छोटा क्यूबा बड़े अमेरिका को हरा सकता है. कैनेडी प्रशासन को बड़ा झटका लगा था..

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ईरान के साथ जारी जंग और अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता को तगड़ा झटका दिया है. ट्रंप की रेटिंग गिरकर 36% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि आर्थिक मोर्चे पर अब ट्रंप की रेटिंग उनसे पहले राष्ट्रपति रहे जो बाइडेन के सबसे खराब दौर से भी नीचे चली गई है.

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