
TVF Sandeep Bhaiya: पापा का सपना था, बड़े भाई से होते हुए मेरे हिस्से आई एक्टिंग... 'संदीप भैया' की कहानी, उन्हीं की जुबानी
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अभी तक के एक्टिंग करियर में कुछ फ़िल्में ऐसी रहीं जो आजतक रिलीज नहीं हुईं. कुछ ऐसी कि जिनमें स्क्रीन टाइम कम मिला... लेकिन इन सब के बीच किसी मलाल का बस्ता उठाए बिना सनी अभी अपने उस किरदार को तलाश रहे हैं जिसके बाद वो एक गहरी सांस लें और कहें- ये है सनी हिंदुजा. हालांकि उससे पहले समय की उठापटक और आपाधापी के बीच मायानगरी में सनी आज संदीप भैया बन चुके हैं.
पहले लोग पूछते थे, अब मैं ख़ुद से पूछता हूं कि इस साल नहीं निकला तो क्या करूंगा... दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर कई सालों से सिविल सर्विसेज़ (UPSC) की तैयारी कर रहे लोगों के बीच जब बैठा तो टीवीएफ की एक सीरीज़ में सुनी इस लाइन से असलियत में मुलाकात हो गई. पता चला कि 'तैयारी' शब्द अपने आप में कितना वज़नदार है. गांव की गलियों से निकलकर आए लोगों के ज़ेहन से गांव निकल चुका है. थकी हुई आंखें किताबों में धंसती जा रही हैं.
ऐसी कई कहानियों को हमने वेबसीरीज के ज़रिये भी देखा, जिसमें सबसे ज्यादा चर्चा में रही टीवीएफ की सीरीज- एस्पिरेंट्स. शुरुआत में लिखी गई लाइन भी उसी वेबसीरीज की है. यूट्यूब पर आते ही इस सीरीज ने देखने वालों के दिल में जगह बना ली. और सबसे ज्यादा जिस किरदार ने लोगों का दिल जीता, वो था- संदीप भैया.
हाल ही में संदीप भैया पर डेडिकेटेड सीरीज का ऐलान हुआ और आज ये आर्टिकल लिखे जाने तक सीरीज के चार एपिसोड रिलीज किये जा चुके हैं. जिस तरह से इस किरदार को प्यार मिला उससे साफ़ ज़ाहिर है कि अब संदीप भैया को लेकर कैसा क्रेज़ रहेगा. यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहे सभी एपिसोड इस बात के गवाह हैं कि टीवीएफ की ये सीरीज हिट हो चुकी है. प्रयागराज में अफसर बनने की उम्मीद टूटी तो दिल्ली का रास्ता पकड़ने वाले संदीप भैया, अपने पहले एपिसोड में मूल्यांकन करते नजर आते हैं. यूपीएससी की तैयारी कर रहे बच्चों की कॉपी चेक करना और उन्हें बताना कि अभी और कितनी मेहनत लगेगी. 'संदीप भैया' की मेहनत का मूल्यांकन तो उनके फैन्स ने कर दिया है. सीरीज़ यूट्यूब पर ट्रेंडिंग की लिस्ट में है. अब तक चार एपिसोड आने के बाद सोशल मीडिया पर अगला कब आएगा की उम्मीद बढ़ चुकी है.
सीरीज में अपने किरदार से लेकर जिंदगी में सबसे अहम किरदार तक... 'संदीप भैया' यानी सनी हिंदुजा (Sunny Hinduja) का कहना है कि वो बहुत लकी रहे कि उन्हें अपने घर की तरफ से काफी सपोर्ट मिला. कई बार इंजीनियरिंग कर रहे स्टूडेंट को थर्ड ईयर तक आते-आते लग जाता है कि वो इंजीनियरिंग के लिए तो नहीं बना, लेकिन सनी इंजीनियरिंग करने से पहले ही यह बात जानते थे कि वो डिग्री मिल जाने के बाद भी इंजीनियर तो नहीं बनेंगे.
AajTak.In के साथ बातचीत में सनी ने बताया कि एक वक़्त बाद उन्हें यह पता चला कि एक्टर बनना तो दरअसल उनके पिता का सपना था, लेकिन किसी वजह से वो पूरा नहीं हो सका. ऐसे में जब मैंने अपने घर में यह बताया कि मैं एक्टर बनना चाहता हूं तो सब खुश थे. पापा ने कितनी ही कोशिश भी की थी कि सनी के बड़े भाई एक्टिंग करियर को अपनाएं लेकिन शायद वो इस फील्ड के लिए नहीं थे. उनका आसमान कोई दूसरा था, सो किस्मत से मेरे हिस्से पापा का सपना आया.













