
TMC नेता की 'बांग्लादेशी नागरिकता' पर विवाद, HC के सख्त रुख के बाद बंगाल में सियासत तेज
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बीजेपी लंबे समय से पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को नागरिकता देने के आरोप लगाती आई है लेकिन टीएमसी नेता आलो रानी सरकार की दोहरी नागरिकता का मामला सामने आने के बाद अब वह बुरी तरह फंस गई हैं.
पश्चिम बंगाल में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में दो देशों की नागरिकता रखने वाली महिला को टिकट देने के मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्ष के निशाने पर आ गई हैं. बीजेपी ने यह मामला सामने आने के बाद पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग की है. दरअसल तृणमूल कांग्रेस ने आलो रानी सरकार को बोंगांव दक्षिण विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था. इनके पास भारत और बांग्लादेश दोनों की नागरिकता है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को टीएमसी नेता को लेकर कहा था कि किसी भारतीय द्वारा दोहरी नागरिकता रखना गैरकानूनी है. बीजेपी ने इसे मुद्दा बना लिया है.
ऐसे होई कोर्ट पहुंचा मामला
टीएमसी नेता आलो रानी सरकार के सामाने बीजेपी से स्वप्न मजूमदार ने चुनाव लड़ा था. बीजेपी नेता ने इस सीट पर जीत भी हासिल की थी. टीएमसी नेता चुनाव परिणामों से असंतुष्ट होकर कोर्ट पहुंची गई थीं. यहां 20 मई को सुनवाई के दौरान उनकी बांग्लादेश की नागरिकता का पता चला, इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है और उनकी नागरिकता को अवैध ठहरा दिया.
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कोर्ट ने पूछा- कैसे जारी हुआ आधार कार्ड-वोटर आईडी
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि बांग्लादेश की नागरिकता होने के बाद भी महिला नेता को कैसे भारतीय आधार कार्ड, वोटर कोर्ड और पैन कार्ड जारी कर दिया गया. टीएमसी उम्मीदवार द्वारा दोहरी नागरिकता रखने का मामला सामने आने के बाद अब बंगाल में विपक्ष में बैठी बीजेपी हमलावर हो गई है.

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