
MP में दूषित पानी से मौतों पर बिठाया 'स्पेशल-6' का पहरा, NGT ने 6 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट; कटघरे में खड़े किए नगर निगम और प्रदूषण बोर्ड
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MP water contamination: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने राज्य के शहरों में सीवेज मिश्रित पानी की सप्लाई को नागरिकों के जीवन के अधिकार का हनन माना है. ग्रीन एक्टिविस्ट कमल कुमार राठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शिव कुमार सिंह की बेंच ने पूरे प्रदेश के नगर निगमों और प्रदूषण बोर्ड को कटघरे में खड़ा किया है.
मध्य प्रदेश के शहरों में सीवेज मिला और दूषित पीने का पानी सप्लाई होने को गंभीर खतरा बताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने इस मामले की जांच के लिए 6 सदस्यों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है. यह कदम राज्य की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई कई मौतों के बाद उठाया गया है.
जस्टिस शिव कुमार सिंह (ज्यूडिशियल मेंबर) और ईश्वर सिंह (एक्सपर्ट मेंबर) की NGT बेंच ने ग्रीन एक्टिविस्ट कमल कुमार राठी की एक याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया और इस मामले में राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सभी स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय की.
एक न्यूज एजेंसी के अनुसार, याचिकाकर्ता ने बताया कि भोपाल के तालाबों में फेकल कोलीफॉर्म (फेकल बैक्टीरिया) की मात्रा खतरनाक स्तर (1600 ml) पर है और सीवेज लाइनें पीने के पानी की लाइनों को दूषित कर रही हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 21 यानी नागरिकों के जीवन की सुरक्षा का अधिकार का सीधा उल्लंघन हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए बेंच ने जमीनी हकीकत की जांच के लिए छह सदस्यों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो छह हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी.
सीनियर एडवोकेट हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया, गुप्ता ने कहा, "कमेटी में IIT इंदौर के डायरेक्टर की तरफ से नॉमिनेटेड एक एक्सपर्ट, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB), भोपाल के प्रतिनिधि, राज्य के पर्यावरण विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, शहरी प्रशासन और विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, जल संसाधन विभाग के प्रतिनिधि और MP पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (MPPCB) के प्रतिनिधि नोडल एजेंसी के तौर पर शामिल हैं."
NGT ने विशेष रूप से आदेश दिया है कि इस आदेश की एक कॉपी मध्य प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों और नगर आयुक्तों को भेजी जाए ताकि इन निर्देशों का तुरंत पालन किया जा सके.

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