
NCERT की किताबों में रामायण और महाभारत? इतिहास भी चार भागों में पढ़ाने का प्लान
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप स्कूल पाठ्यक्रम के चल रहे संशोधन के हिस्से के रूप में, NCERT पैनल ने सामाजिक विज्ञान की किताबों में रामायण और महाभारत के पाठ जोड़ने का प्रस्ताव रखा है. साथ इतिहास को चार भागों में वर्गीकृत करने की सिफारिश की है.
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के सिलेबस में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों को शामिल किया जा सकता है. एनसीईआरटी की सात सदस्यीय हाई लेवल पैनल ने सामाजिक विज्ञान की किताबों में रामायण और महाभारत के पाठ जोड़ने का प्रस्ताव रखा है. इस समिति के अध्यक्ष सी आई इसाक ने बताया कि सिफारिशों में क्लास की दीवारों पर संविधान की प्रस्तावना को स्थानीय भाषा में अंकित करना भी शामिल है.
रामायण और महाभारत को सिलेबस में जोड़ने की वजह NCERT की सोशल साइंस कमेटी ने किताबों में इंडियन नॉलेज सिस्टम, वेदों और आयुर्वेद को शामिल करने की बात कही है. महाकाव्यों को पढ़ाने के महत्व पर जोर देते हुए, समिति के अध्यक्ष सी आई इसाक ने कहा कि सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में रामायण और महाभारत जैसे आख्यानों को एकीकृत करने से छात्रों के प्रारंभिक किशोरावस्था के दौरान उनके आत्म-सम्मान, देशभक्ति और अपने राष्ट्र के प्रति गौरव को बढ़ावा मिल सकता है. उन्होंने देशभक्ति की कथित कमी के कारण विदेश में नागरिकता चाहने वाले कई छात्रों के प्रस्थान का हवाला देते हुए छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपने देश और संस्कृति के प्रति प्रेम पैदा करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला.
तीन नहीं, अब चार भागों में पढ़ाया जाएगा इतिहास इसके अलावा पैनल ने इतिहास को चार अवधियों में वर्गीकृत करने की सिफारिश की है. अब तक किताबों में इतिहास को तीन भागों में पढ़ाया जाता था. इसमें प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारत सेक्शन शामिल हैं. पैनल की सिफारिश पर इतिहास को चार भागों- प्राचीन काल, मध्यकालीन काल, ब्रिटिश युग और आधुनिक भारत में बांटने की बात कही जा रही है.
देश का नाम बदलकर 'भारत' और 'हिंदू जीत' की भी की थी शिफारिश इससे पहले इसी पैनल ने पहले पाठ्यपुस्तकों में देश का नाम 'इंडिया' से बदलकर 'भारत' करने की सिफारिश की थी, ने पाठ्यक्रम में प्राचीन इतिहास के बजाय 'शास्त्रीय इतिहास' शुरू करने का भी सुझाव दिया है.
इसके अलावा, पैनल ने कक्षा 3 से 12 तक की पाठ्यपुस्तकों में "हिंदू जीत" को उजागर करने का प्रस्ताव दिया. इसाक ने प्रस्तावना के महत्व पर जोर दिया, जो लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता जैसे सामाजिक मूल्यों को रेखांकित करता है, और बेहतर समझ और सीखने के लिए इसे कक्षा की दीवारों पर प्रदर्शित करने की सिफारिश की.
कब लागू हो सकता है नया सिलेबस? पिछले साल बनाई गई इस समिति का लक्ष्य सामाजिक विज्ञान पर अपने फाइनल पोजिशन पेपर के माध्यम से नई एनसीईआरटी किताबों के विकास की नींव तैयार करना है. हालांकि, एनसीईआरटी ने अभी तक इन सुझावों पर कोई फैसला नहीं लिया है.

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