
National Herald case: 5 शहरों में संपत्ति, दिल्ली से पटना तक फैली है अरबों की प्रॉपर्टी!
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नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लगातार पूछताछ की जा रही है. ईडी ये पूछताछ कर रही है. आयकर विभाग के आकलन के अनुसार दिल्ली, मुंबई, लखनऊ जैसे बड़े शहरों में कंपनी से जुड़ी संपत्ति की कीमत अरबों में है.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पूछताछ को लेकर चल रहे विरोध और राजनीति के बीच नेशनल हेराल्ड मामला सुर्खियों में बना हुआ है. इससे जुड़े अलग-अलग दावों के बीच अखबार से संबंधित अचल संपत्ति के बारे में कई सवाल उलझे हुए हैं.
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पार्टी के हालिया विरोध को गांधी परिवार के दो हजार करोड़ रुपए बचाने के प्रयास के रूप में बताया है. जाहिर तौर पर यह विवाद यंग इंडियन (YI) की ओर से उधार लिए गए एक करोड़ रुपए के ऋण तक सीमित नहीं है, बल्कि नेशनल हेराल्ड की प्रकाशन कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से संबंधित संपत्तियों के स्वामित्व और मूल्यांकन तक फैला हुआ है.
AJL और YI में क्या है रिश्ता?
एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की स्थापना 20 नवंबर 1937 को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान तत्कालीन कांग्रेस नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा की गई थी. इसका उद्देश्य तीन समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था जिनमें नेशनल हेराल्ड (अंग्रेजी), नवजीवन (हिंदी) और कौमी आवाज (उर्दू) शामिल हैं.
कंपनी ने स्वतंत्रता के बाद और कई राज्यों में सस्ती दरों पर भूमि प्राप्त करने के बावजूद अपना प्रकाशन व्यवसाय जारी रखा. कांग्रेस पार्टी ने अपने ऐतिहासिक संबंधों के कारण AJL को ऋण के साथ मदद करना जारी रखा. 2 अप्रैल 2008 को AJL ने समाचार पत्रों के प्रकाशन को सस्पेंड कर दिया. 2010 के अंत तक AJL पर कांग्रेस पार्टी का 90.21 करोड़ रुपए का ऋण बकाया था.
23 नवंबर 2010 को यंग इंडियन नाम की एक नई कंपनी को दो निदेशकों सुमन दुबे और सत्यन गंगाराम पित्रोदा (सैम पित्रोदा) की ओर से रजिस्टर्ड किया गया था. इसे कंपनी अधिनियम की धारा 25 के तहत एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में शामिल किया गया था. अगले महीने 13 दिसंबर 2010 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कंपनी का डायरेक्टर बनाया गया. कुछ दिनों बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने AJL के सभी ऋणों को यंग इंडियन को ट्रांसफर करने पर सहमति व्यक्त की.

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