
महाराष्ट्र में कहां किसे मिलेगी मेयर की कुर्सी, 11 बजे उठेगा पर्दा, शिंदे की लॉटरी से खुलेगी किस्मत
AajTak
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव के बाद से सभी की निगाहें मेयर पद पर लगी है कि मुंबई से लेकर पुणे और ठाणे तक कौन मेयर बनेगा. अब इससे पर्दा उठने जा रहा है. गुरुवार को 11 बजे शहरी विकास मंत्रालय लाटरी सिस्टम के जरिए आरक्षण तय करेगा.
महाराष्ट्र में मुंबई की बीएमसी सहित 29 नगर महापालिका में अब बारी मेयर के चुनाव की है, जिस पर सभी की निगाहें लगी हुई है. किस शहर में महिला मेयर होगी और किस शहर में ओबीसी, सामान्य वर्ग या फिर अनुसूचित जाति से होगा. गुरुवार को सुबह 11 बजे इससे पर्दा उठ जाएगा, क्योंकि शहरी विकास विभाग आरक्षण की प्रक्रिया के जरिए तय कर देगा.
बीएमसी सहित सभी महानगरपालिका में नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान के जरिए किया जाएगा. अलग-अलग शहरों में नवनिर्वाचित पार्षदों की बुलाई जाने वाली विशेष बैठक में मेयर का चुनाव होगा, लेकिन उससे पहले मेयर किस जाति और किस वर्ग का होगा, ये फॉर्मूला एकनाथ शिंदे के मंत्रालय के द्वारा 'लॉटरी सिस्टम' से तय किया जाना है.
महाराष्ट्र में किस नगर महापालिका का मेयर किस जाति और किस वर्ग से होगा, इसका फैसला राज्य के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट यानि शहरी विकास विभाग के द्वारा तय किया जाता है. राज्य के शहरी विकास विभाग का जिम्मा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. ऐसे में मेयर पद के आरक्षण के लिए शहरी विकास विभाग गुरुवार को लाटरी के जरिए तय करेगा.
मेयर आरक्षण 11 बजे लाटरी से होगा तय मुंबई बीएमसी समेत महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिका में मेयर पद के लिए नगर विकास विभाग आज आरक्षण लॉटरी निकालेगा. शहरी विकास मंत्रालय में सुबह 11 बजे से लॉटरी प्रक्रिया शुरू होगी. कार्यक्रम के अनुसार 29 नगर निगमों की लॉटरी शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल की अध्यक्षता में निकलेगी. लॉटरी निकले के बाद ही तय होगी किस मुंबई सहित 29 शहरों के मेयर महिला और पुरुष में किस वर्ग का होगा. इसके अलावा सामान्य वर्ग, ओबीसी, अनुसूचति जाति या अनुसूचित जनजाति में किस कैटेगरी से होगा.
रोटेशन के आधार पर तय होगा आरक्षण महाराष्ट्र में मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है.कि मुंबई के बीएमसी में पिछली बार मेयर का पद सामान्य के निकला थाा. ऐसे में सामान्य को लॉटरी में नहीं रखा जाएगा. इसी तरह से महाराष्ट्र के बाकी 28 नगर महापालिका में पिछला मेयर जिस वर्ग और जिस कैटेगरी का था, उसे इस बार के लॉटरी सिस्टम में शामिल नहीं किया जाएगा. इस तरह से सभी की निगाहें आरक्षण की लाटरी सिस्टम पर ही टिकी हुई है.
यह भी पढ़ें: उद्धव-राज ठाकरे के बहाने वोटरों ने राजनीतिक दलों को दिए 5 सख्त संदेश

ट्रंप की ईरान को दी गई उस धमकी के बारे में बताएंगे जिसमें उन्होंने कहा कि कि ईरान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा. उनका ये बयान उस संदर्भ में आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरान ट्रंप की हत्या कर सकता है. इस पर ट्रंप ने कहा अगर उन्हें कुछ भी हुआ तो अमेरिका की सेनाएं ईरान को धरती के नक्शे से मिटा देंगी. आज इस बात का विश्लेषण करेंगे कि क्या वाकई ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है?

मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर विवाद गहराया है. अविमुक्तेश्वरानंद सरकार पर कड़े तेवर दिखा रहे हैं. उन पर शंकराचार्य के अपमान का आरोप लगा है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर बैठकर अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान करने से प्रशासन ने रोक लगा दी. समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.






