
फांसी या कोई और विकल्प? मौत की सजा के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
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सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा के लिए फांसी की जगह कम तकलीफदेह विकल्प तलाशने वाली याचिका पर अपनी सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है. साथ ही अदालत ने सभी पक्षों को तीन हफ्ते के भीतर अपनी लिखित दलीलें पेश करने का निर्देश दिया है
सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा के लिए फांसी की जगह कम तकलीफदेह तरीके को अपनाने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार को तीन हफ्ते में लिखित दलील जमा करने को कहा है. दरअसल, याचिकाकर्ता वकील ऋषि मल्होत्रा ने फांसी को मौत की सजा देने को एक क्रूर और अमानवीय तरीका बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. उन्होंने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि फांसी की सजा को बदलकर कोई ऐसा तरीका अपनाया जाए जो कम पीड़ादायक हो. उन्होंने विशेष रूप से जहर के इंजेक्शन (लीथल इंजेक्शन) का सुझाव दिया है. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है. उन्होंने बताया कि सरकार ने एक विशेष कमेटी गठित की है जो मौत की सजा के विभिन्न तरीकों पर अध्ययन कर रही है.
वहीं, सुनवाई के समापन पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार दोनों को अपनी-अपनी बातें लिखित रूप में दर्ज कराने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है. इन लिखित दलीलों के जमा होने के बाद कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुनाएगा. ये निर्णय आने वाले समय में भारत में मृत्युदंड की प्रक्रिया के भविष्य को तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है. फिलहाल, सभी की निगाहें कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हैं.

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