
MP: शिशु मृत्यु दर Sudan से बदतर, किसान भी परेशान लेकिन मंत्री-सांसद को धर्म बचाने की चिंता!
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साख के सवाल के नाम पर क्या सेंसरशिप का ठेका कुछ लोग राजनीति में लेकर बैठ जाएंगे? विज्ञापन में क्या जाएगा, फिल्म में क्या दिखेगा, वेब सीरीज में क्या लिखा जाएगा, ये तय करने के लिए कानून से बनी एजेंसियां हैं. फिर धर्म का हमला बताकर क्यों खुद ही सेंसर बोर्ड नेता बनने लगते हैं? क्या धर्म के नाम पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा होता है? मध्य प्रदेश में शिशु मृत्यु दर सूडान से भी बदतर पता चली है. लेकिन मध्य प्रदेश के मंत्री को चिंता शिशु मृत्युदर से ज्यादा धर्म की है. धर्म के सम्मान की चिंता दिखाने वाले कैसे असली धर्म निभाना भूल जाते हैं, इस रिपोर्ट में देखिए.

मुंबई की सत्ता की असली परीक्षा माने जाने वाले बीएमसी चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर शहर की राजनीति को केंद्र में ला दिया है. देश की सबसे अमीर नगर निगम के जनादेश को सिर्फ स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सियासत की दिशा तय करने वाला संकेत माना जा रहा है. विकास, जवाबदेही और नेतृत्व को लेकर जनता के फैसले पर अब सभी दल अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं.

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बीच शिवसेना (शिंदे गुट) नेता संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियों पर तीखा हमला बोला है. निरुपम ने कहा कि मुंबई अब भाषा और प्रांत की राजनीति से आगे निकल चुकी है और उसे ज़हर भरे विचार नहीं बल्कि विकास चाहिए. उनके मुताबिक, मुंबईकरों ने एजेंडा तय कर दिया है. विकास, विकास और सिर्फ विकास.

MP water contamination: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने राज्य के शहरों में सीवेज मिश्रित पानी की सप्लाई को नागरिकों के जीवन के अधिकार का हनन माना है. ग्रीन एक्टिविस्ट कमल कुमार राठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शिव कुमार सिंह की बेंच ने पूरे प्रदेश के नगर निगमों और प्रदूषण बोर्ड को कटघरे में खड़ा किया है.










