
Arthur Conan Doyle: शेरलॉक लिखने वाले सर आर्थर का क्रिकेट के साथ अनोखा कनेक्शन
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सर आर्थर कोनन डॉयल का जन्म 22 मई 1859 को एडिनबर्ग में हुआ था. यह आज स्कॉटलैंड की राजधानी है. आर्थर का निधन 7 जुलाई 1930 को हुआ था...
सर आर्थर कोनन डॉयल. शेरलॉक नाम के किरदार को रचने वाले राइटर. लिक्खाड़ होने के अलावा डॉक्टर भी थे और इसका पूरा असर शेरलॉक पर दिखाई भी पड़ता है. लेकिन आर्थर इस सब के अलावा एक क्रिकेट प्रेमी भी थे.
जब ये तय हो गया था कि वो लेखक के तौर पर 'सेटल' हो गए हैं और 'शेरलॉक को कुछ नहीं होगा', उन्होंने अपनी मेडिकल प्रैक्टिस बंद की, लिखना और क्रिकेट खेलना शुरू किया. कोनन डॉयल ने एक टीम से खेलना शुरू किया था जिसमें लेखक ही लेखक थे. उनके साथ पीटर पैन के कैरेक्टर को लिखने वाले जेम्स मैथ्यू बैरी, पीजी वोडहाउस खेलते थे.
1900 में आर्थर ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा. एमसीसी की टीम में उन्हें जगह मिली. अपने फर्स्ट क्लास करियर में आर्थर ने लॉर्ड्स में 8 मैच खेले. और इन्हीं 8 मैचों में से शुरूआती एक मैच ने आर्थर को क्रिकेट के इतिहास में एक सुनहरी जगह बिठाया. आर्थर कोनन डॉयल ने डब्लू जी ग्रेस का विकेट लिया. ये आर्थर का एकमात्र फ़र्स्ट क्लास विकेट रहा.
आर्थर ने साल 1927 में एक डब्लू जी ग्रेस की याद में एक लेख लिखा. इसमें आर्थर ने लिखा: "जो उन्हें जानते थे, वो लॉर्ड्स के उस शानदार घास से लदे मैदान को बगैर उस महान खिलाड़ी को ज़हन में रखे नहीं देखेंगे. आप उन्हें कई तरीक़ों से देख सकते हैं. ज़्यादातर ऐसा दिखता है कि वो पवेलियन की सीढ़ियों से नीचे उतर रहे हैं और लगभग 10 हज़ार लोग तालियां बजा रहे हैं.
लाल और पीली टोपी, भारी कंधे और वो मशहूर लम्बी दाढ़ी उस खुले दरवाज़े से बाहर निकलती दिख रही होती है. आप साफ़-साफ़ वो मौका भी देख सकते हैं जब वो विकेट की स्थिति से नाख़ुश थे और उन्हें एक ऐसी जगह दिख गयी थी जिसे रोलर ने मिस कर दिया था.

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












