
विदर्भ ने रच दिया इतिहास... सौराष्ट्र को हराकर पहली बार जीती विजय हजारे ट्रॉफी
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सौराष्ट्र को 38 रनों से पराजित कर विदर्भ ने पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी जीत ली. विदर्भ की यह जीत सिर्फ एक जीत नहीं थी, यह पिछले साल की कड़वी हार से जन्मी दृढ़ता, सीख और मजबूत मानसिकता की कहानी रही.
विदर्भ ने सौराष्ट्र को 38 रनों से हराकर अपनी पहली विजय हजारे ट्रॉफी जीत ली. 18 जनवरी (रविवार) को के बेंगलुरु स्थित भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) ग्राउंड-1 में हुए इस मुकाबले में विदर्भ ने सौराष्ट्र को जीत के लिए 318 रनों का टारगेट दिया था, लेकिन उसकी पूरी टीम 48.5 ओवरों में 279 रनो पर सिमट गई थी.
विजय हजारे ट्रॉफी 2024-25 के फाइनल में कर्नाटक से हारकर विदर्भ का सपना टूट गया था. लेकिन 12 महीने बाद टीम यह ज्यादा मजबूत होकर लौटी और इस बार मौके को हाथ से नहीं जाने दिया.
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी विदर्भ की शुरुआत दमदार रही. सलामी बल्लेबाज अथर्व तायडे ने 118 गेंदों पर 128 रन बनाए, जिसमें 15 चौके और तीन छक्के शामिल रहे. तायडे को यश राठौड़ से शानदार समर्थन मिला, जिन्होंने 54 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली. लोअर मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजों ने भी तेज रन बनाए, जिसके चलते विदर्भ ने 317/8 का बड़ा टोटल खड़ा कर दिया. सौराष्ट्र के लिए अंकुर पंवार ने 4 विकेट लिए, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था.
318 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए सौराष्ट्र कभी भी लय पकड़ नहीं सका. शुरुआती विकेट जल्दी गिर गए. प्रेरक मांकड़ ने 88 रन बनाकर उम्मीद जगाई. चिराग जानी ने भी 64 रन ठोके. लेकिन दोनों के अलावा बाकी बल्लेबाजों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा. विदर्भ की ओर से यश ठाकुर ने 4 विकेट अपने नाम किए. वहीं नचिकेत भूटे को 3 सफलताएं हासिल हुईं.
सौराष्ट्र दो बार विजय हजारे ट्रॉफी जीत चुका है और वो दूसरी बार रनर-अप बना. वहीं विदर्भ के लिए ये जीत इतिहास, बदला और जज्बे की मिसाल बनी. पिछले साल फाइनल में हार का घाव था. इस साल वही हार टीम के लिए प्रेरणा बन गई. अंततः विदर्भ की टीम ने पहली बार यह ट्रॉफी जीत ली.

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