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₹1600 करोड़ का सीक्रेट प्रोजेक्ट, DRDO के प्लान से थर्राया अमेरिका-फ्रांस; यहां चुपके से 'जेट इंजन' पर तगड़ा काम
Zee News
India Chalakere DRDO project: भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है. देश को 2028 तक अपनी पहली एकीकृत रक्षा अनुसंधान 'ऑल्टीट्यूड टेस्ट फैसिलिटी' मिलने वाली है. कर्नाटक के चालाकेरे में बनने वाली यह सुविधा, भारत के लिए एक गेम चेंजर साबित होगी.
India Chalakere DRDO project: दशकों से, भारत को अपने जेट इंजनों और मिसाइलों का उच्च-ऊंचाई वाला परीक्षण करने के लिए विदेशी सुविधाओं, विशेष रूप से रूस के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन मोटर्स (CIAM), पर निर्भर रहना पड़ता था. इस निर्भरता के कारण परियोजनाओं में भारी देरी और लागत में बढ़ोतरी होती थी. अब, ₹1,600 करोड़ के प्रस्तावित निवेश के साथ, यह नई सुविधा भारत को अपनी धरती पर ही ऐसे परीक्षण करने की क्षमता देगी. यह न सिर्फ़ समय और धन बचाएगा, बल्कि स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी के विकास को भी अभूतपूर्व गति देगा.

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








