
यमराज से अपने पति के प्राण कैसे वापस ले आई एक पत्नी? महाभारत की कहानी में आता है वट सावित्री कथा का जिक्र
AajTak
महाभारत की महागाथा एक प्रेरणा स्त्रोत है और उससे भी अधिक प्रेरणा स्त्रोत हैं, इस महान गाथा के छोटे-छोटे प्रसंग. हमारे व्रत-त्योहार और उत्सवों को मनाने और मानने के पीछे जो भी कारण हैं उनकी जड़ें कहीं न कहीं महाभारत से जाकर मिलती हैं. इसी तरह ज्येष्ठ मास की अमावस्या को उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत की पूजा की जाती है. इसका भी वर्णन महाभारत के वन पर्व में मिलता है.
महाभारत सिर्फ दो परिवारों की आपसी लड़ाई की कथा नहीं है, यह त्याग-तपस्या, साहस, कर्तव्य और मानव विकास के कालक्रम की भी कहानी है. इस महान गाथा में आने वाले छोटे-छोटे प्रसंग बहुत महत्वपूर्ण हैं. यह हमारे व्रत-त्योहार और उत्सवों को मनाने और मानने का कारण बनते हैं. ऐसा ही एक व्रत है वट सावित्री व्रत. इसका भी वर्णन महाभारत के वन पर्व में मिलता है.
हस्तिनापुर में दुर्योधन के साथ जुए में सब कुछ हारने के बाद युधिष्ठिर अपने चारों भाइयों और पत्नी द्रौपदी के साथ वनवास झेल रहे थे. इसी बीच एक दिन महर्षि मार्कंडेय वन में आए और युधिष्ठिर की कुटिया पर पहुंचे. महात्मा युधिष्ठिर ने उन्हें देखकर प्रणाम किया और पत्नी व भाइयों सहित ऋषि का सत्कार किया. इसके बाद सभी सत्संग के लिए बैठ गए. ऋषि मार्कंडेय युधिष्ठिर और द्रौपदी को एकटक देखकर यूं ही मुस्कुराने लगे.
मार्कंडेय ऋषि ने वन में सुनाई थी कथा इस पर युधिष्ठिर ने उनसे प्रश्न किया, महात्मा! आपकी इस मंद मुस्कान में क्या रहस्य है? इस पर ऋषि ने कहा- नहीं युधिष्ठिर, यह कोई रहस्य नहीं है. मैं यूं ही देख रहा हूं कि एक बार पहले कभी प्रभु श्रीराम भी ऐसे ही पत्नी और भाई के संग सिर्फ पिता के वचनों के लिए वन में भटके थे, आज मैं तुम्हें देखता हूं कि धर्म के लिए तुमने भी यह व्रत लिया है. मैं सराहना करता हूं कि द्रौपदी भी पूर्ण मनोयोग से तुम्हारे साथ है.
फिर वह द्रौपदी को संबोधित करके कहने लगे- पुत्री! तुम्हारा आत्मबल ही तुम्हारी पहचान है. इसे बनाए रखना. इस धर्मयुद्ध को अगर पांडव अपने बाहुबल से जीतेंगे तो तुम अपने आत्मबल से इनकी सहायता करोगी. तुम में तो यमराज को हराने की शक्ति है, फिर ये घोड़े-हाथी की सेना कहां टिकेगी?
इस पर द्रौपदी ने कहा- महात्मा! आपने आत्मबल से यमराज को हराने की बात कही. जरूर संसार ऐसे उदाहरणों से भरा होगा. हमें भी ऐसी किसी आत्मबल वाली नारी की कथा सुनाइए. तब मार्कंडेय ऋषि ने कहा- तुमने बहुत उत्तम प्रश्न किया है पुत्री. यह कथा जिस नारी की है, वह न सिर्फ आत्मबल की धनी थी, साथ ही सती और पतिव्रता भी थी. उसने तो यमराज से सीधी टक्कर ली थी. मैं तुम्हें उसकी कथा सुनाता हूं और एक पवित्र व्रत के अनुष्ठान की विधि भी बताऊंगा.

मैं चाय बेचकर खुश हूं. मुझे कॉरपोरेट गुलामी से छुटकारा मिल चुका है. पैसा कम है, लेकिन अपने काम में ज्यादा मजा है. इंटरनेट पर वायरल 'Chaiguy' के नाम में मशहूर इस शख्स ने बताया कैसे नौकरी से निकाले जाने के बाद भी वह अमेरिका में टिका हुआ है. इसी जद्दोजहद में वह भारत में वायरल भी हो गया और अब वह अपना सपना पूरा करना चाहता है.

Tulsi Puja Niyam: तुलसी का पौधा केवल पूजा के लिए ही नहीं होता, बल्कि यह सेहत, आसपास के माहौल और मन की शांति के लिए भी बहुत फायदेमंद है. घर में तुलसी लगाने से वातावरण अच्छा रहता है, हवा साफ होती है और मन को सुकून मिलता है. साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे जीवन में अच्छे बदलाव महसूस होते हैं.











