
मणिपुर ही नहीं पूर्वोत्तर के 6 राज्यों में मैतेई समुदाय की अच्छी खासी आबादी, मिजोरम से मेघालय तक बवाल की पूरी कहानी
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मणिपुर में मैतेई सबसे बड़ा समुदाय है. मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53% है. सियासी तौर पर भी मैतेई समुदाय काफी मजबूत है. यहां कुल 60 विधायकों में से 40 विधायक इसी समुदाय से हैं. इतना ही नहीं राज्य के सीएम बीरेन सिंह भी इसी समुदाय से आते हैं.
मणिपुर 83 दिन से सुलग रहा है. यहां गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय और आदिवासियों (कुकी और नागा) के बीच हिंसा फैली हुई है. मैतेई मणिपुर का सबसे बड़ा और प्रमुख जातीय समूह है. मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53% है. इनमें से ज्यादातर लोग इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि 40 प्रतिशत आदिवासी हैं, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं और ये ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं. मणिपुर ही नहीं पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों असम, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय और मिजोरम में भी मैतेई लोगों की आबादी बसी है. इसके अलावा म्यांमार और बांग्लादेश में भी मैतेई रहते हैं.
मणिपुर में फैली हिंसा के मध्य में मैतेई समाज है. मैतेई समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा मांग रहा है. मणिपुर हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एमवी मुरलीधरन ने 20 अप्रैल को इस मामले में एक आदेश दिया था. इस आदेश में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग पर विचार करने को कहा था.
3 मई से राज्य में फैली है हिंसा
कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ 3 मई को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने 'आदिवासी एकता मार्च' निकाला था. ये रैली मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के खिलाफ निकाली गई थी. इसी रैली के दौरान आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसक झड़प हो गई. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. तीन मई की शाम तक हालात इतने बिगड़ गए कि राज्य सरकार ने केंद्र से मदद मांगी. बाद में सेना और पैरामिलिट्री फोर्स की कंपनियों को वहां तैनात किया गया.
सियासी तौर पर मैतेई कितने मजबूत?
मणिपुर में मैतेई सबसे बड़ा समुदाय है. ऐसे में सियासी तौर पर भी मैतेई समुदाय काफी मजबूत है. यहां कुल 60 विधायकों में से 40 विधायक इसी समुदाय से हैं. इतना ही नहीं राज्य के सीएम बीरेन सिंह भी इसी समुदाय से आते हैं. यही वजह है कि उनके इस्तीफे की लगातार मांग हो रही है, इसके बावजूद वे सीएम बने हुए हैं.

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