
बर्लिन में दो दिन तक कैसे गुल रही 45 हजार घरों की बिजली? आतंकी एंगल से जांच शुरू
AajTak
बर्लिन में 3 जनवरी को हुए आगजनी हमले की वजह से 45,000 घरों और दो हजार से ज्यादा व्यवसाय केंद्रों की बिजली गुल हो गई. जर्मनी ने इस घटना की आतंकी हमले के एंगल से जांच शुरू कर दी है.
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में शनिवार को हुए एक हमले के कारण 45,000 घरों और 1,120 व्यवसाय केंद्रों की बिजली आपूर्ति दो दिनों तक ठप रही. बताया जा रहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शहर का ये सबसे लंबा ब्लैकआउट था. जर्मन अधिकारियों ने इस घटना की आतंकी हमले के एंगल से जांच शुरू कर दी है. वहीं, ठंड और शून्य से नीचे तापमान के बीच प्रभावित लोगों की मदद के लिए सरकार ने सेना को बुलाना पड़ा.
जर्मन अधिकारियों ने कहा कि वे शनिवार के हमले की जांच आतंकवादी संगठन की सदस्यता, तोड़फोड़, आगजनी और सार्वजनिक सेवाओं में बाधा डालने के संदेह में कर रहे हैं.अधिकारियों ने बताया कि बर्लिन में गुरुवार से बिजली का आपूर्ति पूरी तरह से बहाल हो गई है.
मदद को बुलानी पड़ी सेना जर्मन समाचार आउटलेट डीडब्ल्यू के अनुसार, मामला इतना गंभीर था कि प्रभावित निवासियों की सहायता के लिए जर्मन सरकार को सेना को बुलाना पड़ा. निकाय अधिकारियों और चैरिटी संस्थाओं ने होटलों, स्कूलों और स्पोर्ट्स सेंटर में लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी.
24 घटें खुले रहे पब्लिक स्विमिंग रिपोर्ट में बताया गया कि पब्लिक स्विमिंग पूल 24 घंटे खुले रखे गए, ताकि लोग नहा सकें. साथ ही लोगों को सर्दी से बचाने के लिए बसों को अस्थायी वार्मिंग स्टेशन बनाए गए. क्योंकि गुरुवार को बर्लिन में तापमान 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इन दिनों बर्लिन में औसत तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. बर्लिन के नागरिक अधिकारियों ने ये भी घोषणा की कि वे बिजली कटौती से प्रभावित निवासियों के होटल खर्च को वहन करेंगे.
3 जनवरी को हुआ हमला आपको बता दें कि 3 जनवरी को क्षिण-पश्चिम बर्लिन के लिच्टरफेल्डे इलाके में तेल्टो नहर पर एक केबल ब्रिज पर आगजनी हुई थी. इस हमले में कई हाई-वोल्टेज केबल क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे निकोलाससी, जेहलेंडॉर्फ, वानसी और लिच्टरफेल्डे जैसे चार जिलों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी. ठंड के कारण मरम्मत कार्य में देरी हुई और बिजली पूरी तरह बहाल होने में बुधवार तक का वक्त लगा. मामला इतना गंभीर था कि जर्मन सेना (बुंडेसवेहर) को प्रभावित लोगों की मदद के लिए बुलाया गया. सेना ने इमरजेंसी जनरेटरों को रिफ्यूल करने और लॉजिस्टिक्स में सहायता की.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को खुले तौर पर धमकी दी है. अमेरिकी सीनेटर और ट्रंप के करीबी लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों की हत्या करते रहेंगे, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खामेनेई को मारने का आदेश दे सकते हैं. इस धमकी को ग्राहम ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में दी, जिसमें उन्होंने ईरान से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तुरंत बंद करने को कहा.












