
वेनेजुएला में खौफ के वो 12 मिनट... जब रिचर्ड निक्सन और उनकी पत्नी को जिंदा निगलने वाली थी भीड़
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साल 1958 में अमेरिका के तत्कालीन उपराष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन 8 लैटिन अमेरिकी देशों के 18 दिनों के दौरे पर गए. इन आठ देशों में वेनेजुएला भी था, जहां निक्सन और उनकी पत्नी पैट बाल-बाल बचने में कामयाब रहे. इस भयावह हादसे का निक्सन ने बाद में अपनी किताब Six Crises में विस्तार से जिक्र किया है.
1950 का दशक इतिहास में उथल-पुथल, टकराव और बड़े बदलावों का दौर रहा. यह वो समय था जब दूसरे विश्वयुद्ध की राख से एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही थी और उसी के साथ पुराने घाव भरने के बजाय और गहरे होते जा रहे थे. इसी दौर में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैचारिक जंग खुलकर सामने आई. तकरीबन हर महाद्वीप एक संभावित रणभूमि में तब्दील हो चुका था. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर ने अपने भरोसेमंद, उपराष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को दक्षिण अमेरिकी देशों के 18 दिनों के सद्भावना दौरे पर रवाना किया. कागजों में यह मिशन दोस्ती और लोकतांत्रिक मूल्यों का पैगाम समेटे हुए था लेकिन असल मकसद था, लैटिन अमेरिका में सोवियत कम्युनिज्म के बढ़ते प्रभाव पर नकेल कसना. उरुग्वे से शुरू हुआ निक्सन का यह दौरा अर्जेंटीना, पैराग्वे, बोलीविया, पेरू, इक्वाडोर और कोलंबिया होते हुए वेनेजुएला पर खत्म होना था. पर वेनेजुएला में जो कुछ हुआ, वह निक्सन के राजनीतिक जीवन का सबसे डरावना अनुभव बना, जिसे वह चाहकर भी कभी नहीं भुला पाए.
13 मई 1958 की भरी दुपहरी जब रिचर्ड निक्सन अपनी पत्नी पैट निक्सन के साथ वेनेजुएला के काराकस एयरपोर्ट पर उतरे, तो उन्हें पहली नजर में सब कुछ वैसा ही लगा, जैसा किसी औपचारिक राजकीय दौरे में होता है. रनवे पर सरकारी अधिकारी मौजूद थे, प्रोटोकॉल के हिसाब से स्वागत की तैयारियां थीं. लेकिन निक्सन के भीतर कहीं एक हल्की सी बेचैनी थी. इससे पहले उन्हें पेरू और कोलंबिया में कई जगह खुला विरोध झेलना पड़ा था. वे जानते थे कि वेनेजुएला की जमीन अमेरिका विरोधी भावनाओं से पहले से ही गरम है.
निक्सन को ये भी एहसास था कि वे एक ऐसे मुल्क में कदम रख रहे हैं, जहां हाल ही में तानाशाह मार्कोस पेरेज जिमेनेज की सत्ता उखड़ चुकी है. निक्सन ने 1962 में अपनी आत्मकथा Six Crises में वेनेजुएला के इस दौरे का विस्तार से जिक्र किया है. उन्होंने किताब में लिखा कि उन्हें वेनेजुएला में विरोध की आशंका थी, लेकिन काराकस में जो हुआ, वह किसी भी अनुमान से कहीं ज्यादा डरा देने वाला था. एयरपोर्ट टर्मिनल के बाहर Yankee Go Home और Down with Nixon जैसे नारे लग रहे थे. यह शोर किसी सामान्य राजनीतिक विरोध जैसा नहीं था.
वह किताब में बताते हैं कि एक जगह भीड़ इतनी करीब और आक्रामक थी कि सुरक्षा घेरा लगभग बेअसर लग रहा था. लोग चिल्ला रहे थे, गालियां दे रहे थे और जैसे-जैसे वे आगे बढ़ रहे थे. भीड़ बेकाबू होती जा रही थी. Six Crises में निक्सन अपनी पत्नी पैट का जिक्र करते हुए कहते हैं कि पैट ने वेनेजुएला की इस खास ट्रिप के लिए लाल रंग का सूट पहना था. वह शांत थीं लेकिन लाल रंग की वजह से भीड़ में साफ नजर आ रही थीं और यही बात मुझे परेशान कर रही थी. अब यह कोई राजनयिक संकट नहीं बल्कि निजी डर बन गया था. एक पति अपनी पत्नी को बचाने की कोशिश कर रहा था. एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ स्थानीय अधिकारी और सुरक्षाकर्मी असहाय नजर आ रहे थे. यही वजह थी कि एयरपोर्ट जो आमतौर पर सबसे सुरक्षित मानी जाती है, उस दिन उनके लिए खतरनाक जगह बन गई.
एयरपोर्ट पर जब निक्सन और पैट राष्ट्रगान के लिए खड़े थे, ऊपर की ऑब्जर्वेशन डेक से भीड़ थूक रही थी. थूक पैट के लाल सूट पर गिर रहा था. निक्सन किताब में इसका जिक्र करते हुए कहते हैं कि While the national anthem was playing, the crowd spat on us. भीड़ में कई लोग तंबाकू चबा रहे थे. पैट के लाल सूट पर तंबाकू की पीक के निशान थे. पर पैट ने उस वक्त कोई भाव जाहिर नहीं किया. वह सहज बनी रही. एक तरफ मुझे दुख हुआ कि पैट को इससे गुजरना पड़ा तो दूसरी तरफ गर्व भी महसूस हो रहा था कि वह साहस से इन सबका सामना कर रही थी. लेकिन मैं जैसे ही एयरपोर्ट लॉबी की ओर बढ़ा, किसी ने मेरे चेहरे की ओर कोई चीज फेंकी. वह सीटी थी. मैंने उसे उठाया और उसे वापस भीड़ की तरफ फेंकने की सोची लेकिन फिर मैंने उसे ये सोचकर जमीन पर भी फेंक दिया कि इसे कहीं भीड़ पर हमले की तरह ना देखा जाए.

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