
ट्रंप के तेवरों ने बढ़ाया तीसरे विश्व युद्ध का खतरा... रूसी तेल टैंकर पकड़ने का क्या होगा अंजाम?
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अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ को जब्त कर लिया है. इससे अमेरिका-रूस के बीच सीधा टकराव वैश्विक चिंता का कारण बन गया है. सवाल उठने लगा है कि क्या ट्रंप दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रहे हैं?
डोनाल्ड ट्रंप जब सत्ता में आए थे तो उन्होंने अमेरिकी जनता से यूक्रेन युद्ध रुकवाने का वादा किया था. लेकिन नया साल शुरू होते ही उनके कदम दुनिया में शांति के बजाय तनाव और टकराव को बढ़ाते नजर आ रहे हैं. यूक्रेन युद्ध अभी खत्म भी नहीं हुआ कि मिडिल ईस्ट में आग भड़क चुकी है. इस बीच अब अमेरिका-रूस के बीच सीधा टकराव वैश्विक चिंता का कारण बन गया है. सवाल उठने लगा है कि क्या ट्रंप दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रहे हैं?
ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ को जब्त कर लिया है. यह कार्रवाई अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सेना के संयुक्त ऑपरेशन में की गई. अमेरिकी दावा है कि यह टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर अवैध रूप से वेनेजुएला का तेल ले जा रहा था. यह वही टैंकर है जिसका पुराना नाम ‘बेला-1’ था और जिस पर 2024 में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे. बाद में इसका नाम बदलकर मरीनेरा कर दिया गया.
समंदर में दिखी अमेरिकी की 'दादागिरी'
यह ऑपरेशन किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था. समंदर में तैरता टैंकर, उसके ऊपर मंडराता हेलीकॉप्टर और रस्सियों के सहारे उतरते अमेरिकी जवान. खास बात यह रही कि अमेरिका की यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई जब उसी इलाके में रूसी नौसेना के युद्धपोत और पनडुब्बियां भी मौजूद थीं. हालांकि जब अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने टैंकर पर कब्जा किया, उस समय आसपास कोई रूसी जहाज नहीं था. इस ऑपरेशन में ब्रिटेन ने अमेरिका का पूरा साथ दिया.
रूस ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. रूसी सीनेटर एंड्री क्लिशस ने इसे खुले समुद्र में घोर समुद्री डकैती करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन बताया. रूस ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी देश को दूसरे देश के विधिवत पंजीकृत जहाज के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है. अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि रूस इसका जवाब किस तरह देता है.
अमेरिका ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए कैरिबियन सागर में ‘एम/टी सोफिया’ नामक एक और तेल टैंकर को जब्त किया, जो वेनेजुएला का तेल लेकर चीन की ओर जा रहा था. इससे साफ है कि ट्रंप प्रशासन तेल के कारोबार और उस पर नियंत्रण को लेकर बेहद आक्रामक नीति अपना रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

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