
बंटेंगे तो कटेंगे का नारा, यूपी मॉडल की धूम... योगी की बढ़ती नेशनल डिमांड का इशारा क्या है? | Opinion
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योगी आदित्यनाथ का नया नारा 'बंटेंगे तो कटेंगे' राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव छोड़ने लगा है. चुनावी रैलियों में योगी आदित्यनाथ ये नारा बार बार दोहरा रहे हैं, और योगी मॉडल की तारीफ जनसेना पार्टी के नेता पवन कल्याण भी करने लगे हैं.
योगी आदित्यनाथ के लिए सबसे महत्वपूर्ण तो यूपी के उपचुनाव हैं. लेकिन, ऐन उसी वक्त महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव कैंपेन में भी योगी आदित्यनाथ की भारी डिमांड है.
महाराष्ट्र के कई इलाकों में तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ 'बंटेंगे तो कटेंगे' वाले स्लोगन वाले होर्डिंग भी देखे गये हैं - और शायद ही कोई उनकी चुनावी रैली होती हो, जहां योगी आदित्यनाथ अपना ये नारा न दोहराते हों.
बांग्लादेश के हालात का जिक्र करते हुए अगस्त, 2024 में योगी आदित्यनाथ ने कहा था, 'कोई राष्ट्र तभी मजबूत रह सकता है... जब हम एकजुट, और धर्मनिष्ठ रहेंगे... बंटेंगे तो कटेंगे.' और उसके बाद से तो ये नारा जैसे वायरल ही हो गया.
समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने योगी आदित्यनाथ के बयान की आलोचना जरूर की थी, लेकिन योगी आदित्यनाथ का बयान आने के कुछ ही दिन बाद इस तरह की बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में सुनी गईं.
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना था, देश के इतिहास में किसी भी राजनीतिक दल ने इससे अधिक नकारात्मक नारा नहीं दिया है. असदुद्दीन ओवैसी कह रहे थे, योगी आदित्यनाथ के राज्य में मुस्लिमों के घर बुलडोजर से तोड़े जा रहे हैं... वो खुद मुसलमानों के खिलाफ़ नफरत भरे भाषण देते हैं... ठोक दूंगा कहते हैं.
जातीय राजनीति के खिलाफ योगी की मुहिम

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