
पुलिस जांच, TMC नेताओं की चुप्पी... सवालों के घेरे में ममता सरकार, क्या बंगाल की राजनीति में टर्निंग पॉइंट साबित होगा कोलकाता रेप केस?
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ममता सरकार के 13 साल में शायद पहली बार सत्ता विरोधी माहौल बनता दिख रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रेनी डॉक्टर से हैवानियत पश्चिम बंगाल की राजनीति को बदलने वाली साबित होगा, क्योंकि कोलकाता में डॉक्टर से रेप और मर्डर केस पर ममता बनर्जी चौतरफा घिर गई हैं.
ममता बनर्जी यानी वो कद्दावर नेता जिसकी सादगी जनता को पसंद है और जिनकी उंगलियों के इशारे पर पश्चिम बंगाल की राजनीति पिछले 23 साल से नाच रही है. लेकिन क्या कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर से हुई दरिंदगी पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होगी?
69 साल की ममता बनर्जी को उनके समर्थक सियासी योद्धा मानते हैं. ये ममता ही थीं जिन्होंने अकेले ही पश्चिम बंगाल पर 34 साल से काबिज वाम मोर्चे की सरकार का सफाया कर दिया. ये ममता बनर्जी ही थीं जिनके भारी विरोध की वजह से ही टाटा को अपनी लखटकिया नैनो परियोजना को समेटकर बंगाल से गुजरात जाना पड़ा था. सिंगूर और नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों ने ही ममता बनर्जी को सत्ता में पहुंचाया था.
टीएमसी नेता भी ममता सरकार पर हमलावर
ममता सरकार के 13 साल में शायद पहली बार सत्ता विरोधी माहौल बनता दिख रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रेनी डॉक्टर से हैवानियत पश्चिम बंगाल की राजनीति को बदलने वाली साबित होगा, क्योंकि कोलकाता में डॉक्टर से रेप और मर्डर केस पर ममता बनर्जी चौतरफा घिर गई हैं. एक तरफ जहां विरोधी प्रशासन की लापरवाही को मुद्दा बनाकर उनसे इस्तीफा मांग रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी के नेता और सहयोगी भी ममता सरकार पर हमलावर हैं.
क्या ममता को उठाना पड़ेगा राजनीतिक नुकसान?
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी मुद्दे पर बंगाल सरकार की इतनी फजीहत हो रही है. पहले भी संदेशखाली का मामला हो या फिर आसनसोल हिंसा. ममता बनर्जी बैकफुट पर रह चुकी हैं. लेकिन इन फजीहतों के बावजूद ममता बनर्जी के सियासी कद पर कोई फर्क नहीं आया. उनकी पार्टी इन इलाकों में लगातार जीत दर्ज करती रही. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार ममता कोलकाता रेप केस के आरोपों से राजनीतिक नुकसान को रोक पाएंगी?

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