तेलंगााना का शिव मंदिर वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल, जानिए- कैसे मिलता है विश्व धरोहर का दर्जा, क्या हैं फायदे
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जानिए कैसे किसी ऐतिहासिक धरोहर को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया जाता है. इस धरोहर को किन बिंदुओं में परखकर ये दर्जा दिया जाता है. इसका क्या फायदा मिलता है.
UNESCO ने रविवार को तेलंगाना के काकतीय रुद्रेश्वर रामप्पा मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल किया. तेलंगाना के काकतिया वंश के महाराजा गणपति देव ने सन 1213 में मंदिर का निर्माण शुरू कराया था. जानिए कैसे किसी ऐतिहासिक धरोहर को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया जाता है. किसी धरोहर को किन बिंदुओं में परखकर ये दर्जा दिया जाता है. इसका क्या फायदा मिलता है. पूरी दुनिया में ऐसी कई मानव निर्मित इमारतें हैं जो आज विश्व धरोहर का दर्जा पा चुकी हैं. विश्व धरोहर यानी वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों, भवनों को ही नहीं बल्कि शहर, रेगिस्तान, जंगल, द्वीप, झील, स्मारक, पहाड़ किसी को भी मिल सकता है. इसके तय मानक होते हैं जिसके आधार पर वर्ल्ड हेरिटेज साइट समिति इनका चयन करती है. ये समिति UNESCO World Heritage Convention, 1972 के तहत आती है. विश्व धरोहर के तौर पर ऐसी चीजों को परिभाषित किया जाता है जो इंसान की अपनी जड़ों से धीरे-धीरे विकसित हुआ है. मानव संस्कृति के लिहाज से ऐसी जगहें और इमारतें जिनकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता है उन्हें विश्व धरोहर यानी वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया जाता है जिनके संरक्षण, रखरखाव और वैश्विक प्रचार में यूनेस्को मददगार होता है.
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