तमिलनाडु के मंत्री की बर्खास्तगी पर केरल के राज्यपाल ने सुनाया अपना किस्सा, जानिए क्या हुआ था
AajTak
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को मंत्री सेंथिल बालाजी को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया. आचोलना होने पर कुछ ही घंटों के बाद आदेश वापस ले लिया गया. इसको लेकर राज्यपाल विपक्ष के निशाने पर हैं. इस बीच अब केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी मंत्री की बर्खास्तगी से जुड़े अपने एक किस्से को याद किया है.
तमिलनाडु के राज्यपाल मंत्री सेंथिल बालाजी की बर्खास्तगी का आदेश जारी करने के बाद से लगातार निशाने पर हैं. गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद भले ही मंत्री की बर्खास्तगी के फैसले पर राज्यपाल ने रोक लगा दी है, मगर ये मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. एक तरफ तमिलनाडु सरकार राज्यपाल पर गंभीर आरोप लगा रही है, तो वहीं विपक्षी नेता भी इस फैसले को असंवैधानिक करार दे रहे हैं.
इस सबके बीच केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी अपना एक किस्सा साझा किया है. उन्होंने बताया कि मैंने केरल के वित्त मंत्री को बर्खास्त करने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिया था. हालांकि, राज्यपाल आरिफ ने इसे तमिलनाडु के मामले से अलग बताया है. दरअसल, पिछले साल अक्टूबर में केरल के राज्यपाल आरिफ और पिनारई सरकार के बीच वित्त मंत्री को लेकर तनातनी देखने को मिली थी.
केरल के वित्त मंत्री के भाषण से शुरू हुआ था विवाद
विवाद वित्त मंत्री के एक भाषण के बाद शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने राज्यपाल को टारगेट करते हुए कहा था कि जो लोग उत्तर प्रदेश जैसे स्थानों से आ रहे हैं, उनके लिए केरल के विश्वविद्यालयों को समझना मुश्किल है. तब आरिफ मोहम्मद ने कहा था कि वित्त मंत्री का बयान केरल और भारतीय संघ के अन्य राज्यों के बीच खाई पैदा करता है और गलत धारणा पेश करता है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में उच्च शिक्षा की अलग-अलग प्रणाली है.
'नाराजगी का मतलब बर्खास्तगी नहीं'
अब तमिलनाडु में राज्यपाल और सरकार के बीच चल रहे टकराव के बीच केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने पिछले साल वित्त मंत्री केएन बालगोपाल से नाराजगी जाहिर करने को सही ठहराया है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि मंत्री से नाराजगी का मतलब उनकी बर्खास्तगी नहीं है.

मुंबई की सत्ता की असली परीक्षा माने जाने वाले बीएमसी चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर शहर की राजनीति को केंद्र में ला दिया है. देश की सबसे अमीर नगर निगम के जनादेश को सिर्फ स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सियासत की दिशा तय करने वाला संकेत माना जा रहा है. विकास, जवाबदेही और नेतृत्व को लेकर जनता के फैसले पर अब सभी दल अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं.

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बीच शिवसेना (शिंदे गुट) नेता संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियों पर तीखा हमला बोला है. निरुपम ने कहा कि मुंबई अब भाषा और प्रांत की राजनीति से आगे निकल चुकी है और उसे ज़हर भरे विचार नहीं बल्कि विकास चाहिए. उनके मुताबिक, मुंबईकरों ने एजेंडा तय कर दिया है. विकास, विकास और सिर्फ विकास.

MP water contamination: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने राज्य के शहरों में सीवेज मिश्रित पानी की सप्लाई को नागरिकों के जीवन के अधिकार का हनन माना है. ग्रीन एक्टिविस्ट कमल कुमार राठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शिव कुमार सिंह की बेंच ने पूरे प्रदेश के नगर निगमों और प्रदूषण बोर्ड को कटघरे में खड़ा किया है.










