
जम्मू में नए मतदाता जोड़ने वाला विवादित फैसला वापस लिया गया
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जम्मू में जिला उपायुक्त अवनी लवासा ने अपने उस फैसले को वापस ले लिया है जहां कहा गया था कि एक साल से अधिक समय से जम्मू में रह रहे लोगों को वोटिंग करने का अधिकार मिलेगा. वे खुद को वोटर लिस्ट में शामिल करवा पाएंगे. बिना किसी सफाई या स्पष्टीकरण के ये फैसला वापस हुआ है.
जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाने को लेकर जमीन पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इसी कड़ी में बुधवार को जम्मू की जिला उपायुक्त अवनी लवासा ने एक आदेश जारी कर कहा था कि जो भी शख्स जम्मू में एक साल से ज्यादा समय से रह रहा होगा, उसे वोटिंग का अधिकार रहेगा. अगर उसके पास जरूरी दस्तावेज नहीं भी हुए, फिर भी उसे मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा. अब उसी फैसले को वापस ले लिया गया है. औपचारिक ऐलान तो नहीं किया गया है, लेकिन खबर है कि भारी विरोध के बाद इस फैसले को अभी के लिए वापस ले लिया गया है.
किस फैसले पर था सारा बवाल?
जानकारी के लिए बता दें कि बुधवार को अवनी लवासा ने एक आदेश में स्पष्ट कहा था कि जम्मू में एक साल से अधिक समय से रह रहे हर शख्स को वोटिंग का अधिकार मिलेगा. ऐसा होने पर जो शख्स जम्मू का नहीं भी होगा, उसे वहां पर वोटिंग करने का अधिकार मिल जाता. इस फैसले के सामने आते ही जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सियासी भूचाल आया था. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस फैसले का विरोध किया था. जोर देकर कहा गया कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर की वोटर लिस्ट में 25 लाख नए वोटरों को जोड़ने की कवायद कर रही है.
जारी बयान में एनसी ने कहा था कि सरकार 25 लाख गैर स्थानीय लोगों को वोटर लिस्ट का हिस्सा बनाने वाली है. हम इस फैसले का विरोध करते हैं. बीजेपी चुनावों से डर रही है, उसे पता है कि वो बुरी तरह हारने वाली है. जनता को बीजेपी की इस साजिश को बैलेट बॉक्स के जरिए हरा देना चाहिए.
बिना कारण बताए फैसला वापस
बड़ी बात ये है कि ये मुद्दा पहली बार अगस्त में सामने आया था जब तत्कालीन मुख्य चुनाव अधिकारी हृदेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष संशोधन के बाद जम्मू-कश्मीर को बाहरी लोगों सहित लगभग 25 लाख अतिरिक्त मतदाता मिलने की संभावना है. इस पैसले का बीजेपी ने तो स्वागत किया था, लेकिन बाकी सभी दलों ने विरोध किया. इसी वजह से जब अवनी लवासा का नया आदेश सामने आया, इसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा. अभी के लिए उस विवादित फैसले को वापस तो ले लिया गया है, लेकिन कोई स्पष्टीकरण या कारण नहीं बताया गया है.

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