
गढ़ बचा न वर्चस्व रहा! पुणे और PCMC में पवार परिवार का 'क्लीन स्वीप', चाचा-भतीजे के अभेद्य किले में BJP की सेंध
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महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव के परिणाम ने सबको चौंका दिया. पुणे और पिंपरी चिंचवड़ जो कि पवार परिवार का गढ़ माना जाता था, वहां बीजेपी ने धमाल मचा दिया. बीजेपी ने दोनों निगमों में भारी बहुमत हासिल कर एनसीपी के दोनों गुटों को पीछे छोड़ दिया.
महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम चुनावों के नतीजों ने पश्चिम महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह से बदल दिया है. वह क्षेत्र जो कभी अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का गढ़ माना जाता था, आज बीजेपी के प्रभाव में आ गया है. इन चुनावों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार की राजनीतिक पकड़ को गहरा झटका दिया है.
पुणे नगर निगम में बीजेपी ने 165 सीटों में से 119 पर जीत दर्ज कर अभूतपूर्व बहुमत हासिल किया, जबकि पिंपरी चिंचवड़ में 128 सीटों में से 84 सीटें जीत लीं.
यह आंकड़े दिखाते हैं कि शहरी महाराष्ट्र में एनसीपी की पकड़ तेजी से कमजोर हो रही है. दो साल पहले अजित पवार के अलग गुट बनने के बाद से पार्टी की स्थिति और भी नाजुक हो गई है. हालांकि, नगर निगम चुनावों में एनसीपी और एनसीपी (एसपी) ने एकजुट होकर बीजेपी को रोकने की कोशिश की, लेकिन यह रणनीति कामयाब नहीं हो सकी.
पुणे में एनसीपी के पार्षदों की संख्या 43 से घटकर 27 रह गई, जबकि पिंपरी चिंचवड़ में बीजेपी ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली. अजित पवार का गुट महज 37 सीटों पर सिमट गया.
ख़ासतौर से पुणे में यह चुनाव बीजेपी और अजित पवार के गुट के बीच सीधी टक्कर साबित हुई, जहां भीड़भाड़ वाले प्रचार और मीडिया बयानबाजी का कोई खास असर नहीं हुआ. आखिर बीजेपी की मजबूत संगठनात्मक ताकत और विकास के कामों पर केंद्रित प्रचार ने बाजी मार ली.
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