
चाइना विदेशी लोगों को फेवर कर रहा है...चीन के K वीजा पर भड़के चीनी कर्मचारी
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K वीज़ा चीन द्वारा पेश किया जाने वाला एक नया वीज़ा है, जिसका उद्देश्य विदेशी युवाओं और पेशेवरों को शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में काम, अध्ययन और सहयोग का अवसर प्रदान करना है. इस वीजा का
चीन ने विदेशी कैंडिडेट्स के K वीज़ा को अभी तक लागू नहीं किया है, जो पहले 1 अक्टूबर से लागू होना था. आर्थिक मंदी के बीच देश में रोज़गार की स्थिति को लेकर नए वीज़ा की चीनी सोशल मीडिया पर आलोचना हो रही है. चाइना के कैंडिडेट्स का मानना है उनका देश विदेशी कर्मचारियों को ज्यादा महत्व दे रहा है जबकि उन्हें अपने देश की बेरोजगारी पर पहले ध्यान देना चाहिए.
अगस्त में घोषित K वीज़ा पर तब तक ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया जब तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा के लिए 100,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लागू नहीं कर दिया. प्रवक्ता गुओ जियाकुन के अनुसार, K वीज़ा का मकसद चीनी और अंतर्राष्ट्रीय युवा पेशेवरों के बीच विज्ञान और तकनीक में आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाना है.
निर्धारित लॉन्च में देरी 1 अक्टूबर को लॉन्च होने की योजना के बावजूद, चीनी दूतावासों ने अभी तक इस वीज़ा को सूचीबद्ध नहीं किया है. पीटीआई का दावा है कि चीन के H-1B वीज़ा के रूप में प्रचारित इस नए वीज़ा को चीनी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा है. इंटरनेट यूजर्स ने मौजूदा उच्च बेरोजगारी दर को देखते हुए इसके समय पर सवाल उठाए हैं.
चीन में बेरोज़गारी दर
चीन में बेरोज़गारी दर पिछले दो वर्षों में लगभग 19 प्रतिशत बताई गई है और स्थानीय नौकरियों पर दबाव पहले से ही बहुत ज़्यादा है, क्योंकि हर साल 1.2 करोड़ स्नातक नौकरी के बाज़ार में प्रवेश करते हैं.
हांगकांग की साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, आलोचकों ने STEM स्नातक डिग्री को ज़रूरी मानने पर सवाल उठाए हैं. कुछ लोगों का मानना है कि यह नीति चीन में पढ़ाई पूरी करने वाले की बजाय विदेशी स्नातकों को ज्यादा फायदा देती है. वहीं, कुछ लोगों को डर है कि नियोक्ता प्रायोजन नहीं होने से धोखाधड़ी बढ़ सकती है और कम गुणवत्ता वाले आवेदकों की संख्या बढ़ सकती है.

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