
घटना के बाद बेसमेंट क्लासेज की एक अलग इमेज बन गई है! जानिए- विकास दिव्यकीर्ति ऐसा क्यों बोले
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राजेंद्र नगर में एक कोचिंग सेंटर में तीन स्टूडेंट्स की मौत के बाद एमसीडी ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कई अवैध और बेसमेंट में चल रहे कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया. इसमें विकास दिव्यकीर्ति की दृष्टि आईएएस कोचिंग भी शामिल है. इस हादसे को लेकर विकास दिव्यकीर्ति ने अब खुलकर बात की है.
जब यूपीएससी के मामले में बड़े शिक्षाविदों को याद किया जाता है तो उसमें एक नाम विकास दिव्यकीर्ति का भी लिया जाता है. सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स विकास दिव्यकीर्ति को अपने आर्दश के रूप में देखते हैं. शायद इसीलिए दिल्ली के ओल्ड नगर कोचिंग हादसे में विकास दिव्यकीर्ति की चुप्पी ने सभी को परेशान किया था. तीन दिन की इस चुप्पी में बच्चे सवाल करते रहे कि शिक्षाविद विकास दिव्यकीर्ति कहा हैं और छात्रों के हित के लिए अब बात क्यों नहीं कर रहे. तीन दिन बाद विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी चुप्पी तोड़ी और राजेंद्र नगर हादसे पर बात की है.
न्यूज ऐजंसी ANI को दिए हुए इंटरव्यू में विकास दिव्यकीर्ति ने बताया कि कोचिंग हादसे को लेकर वो किसे जिम्मेदार ठहराते हैं और उनकी खुदकी कोचिंग सील होने पर उनकी राय क्या है. विकास दिव्यकीर्ति से जब पूछा गया कि बच्चे आपसे नाराज हैं, उसपर आप क्या कहना चाहेंगे तो उन्होंन बोला कि 'हमसे चूक हुई है, यह कहा जा सकता है लेकिन ये चूक ऐसी है, जिसमें हमारी नीयत खराब नहीं थी, लेकिन हां नियम स्तर पर चूक हुई है. विचित्र बात ये है कि दिल्ली में कोचिंग संस्थानों की संख्या कम से कम एक हजार तो होगी, ज्यादा भी हो सकती हैं. जो नॉर्म हैं फायर एनओसी, एजुकेशन बिल्डिंग, मेरा अनुमान है कि इन हजारों से एक के पास भी यह एनओसी नहीं होगी.
तीन दिन क्यों चुप रहे विकास दिव्यकीर्ति?
विकास दिव्यकीर्ति ने आगे कहा कि जब कोई हादसा होता है तो मोटी-मोटी चीजें सामने आती हैं कि फायर एनओसी नहीं है या जो भी, फिर जनता का आक्रोश फट सकता है. इसके पीछे की परिस्थितियां क्या हैं यह सोचने या समझने के लिए धैर्य चाहिए. तो मैं असल में तीन दिन यह चाह रहा था कि पहले सारी स्थितियां सामने आ जाएं, 1-2 दिन तक तो यही स्पष्ट नहीं हो रहा था कि कितने बच्चे थे. धीरे-धीरे चीजें स्पष्ट हुईं.
बेसमेंट सील होने पर क्या बोले शिक्षाविद?
जहां तक बात है हमारे बेसमेंट की. एक मुखर्जी नगर में है, करोल बाग में 4-5 बिल्डिंग हैं उनमें से एक बिल्डिंग की बेसमेंट सील हुई है. करोल बाद में जो बेसमेंट है, वो अप्रूव्ड बेसमेंट है. कर्मशियल बेसमेंट है. इसकी एनओसी में लिखा हुआ है कि इसमें ऑफिस चलाया जा सकता है और इसमें वाकई में ऑफिस चल रहा था. लेकिन अभी एमसीडी पर दबाव था तो उन्होंने बिना विचार किए सब सील किया है.

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