
1 करोड़ फीस, मनपसंद स्पेशलिटी... आखिर क्यों NEET-PG में खाली रह जाती हैं हजारों सीटें?
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अक्सर देखने को मिलता है कि नीट पीजी में हजारों सीटें खाली रह जाती हैं और इसके बाद कट-ऑफ काफी कम हो जाती है. तो जानते हैं किस कारणों से सीटें खाली रहती हैं.
नीट पीजी 2025 परीक्षा इन दिनों चर्चा में हैं. परीक्षा के चर्चा में आने की वजह है एडमिशन के लिए जारी की गई कट-ऑफ. दरअसल, हाल ही में जो कट-ऑफ लिस्ट जारी की गई है, उसमें रिजर्व्ड कैटेगरी के कट-ऑफ माइनस 40 नंबर है. इसके बाद से इसे लेकर बवाल हो रहा है और लोग सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस बार 18000 सीटें खाली हैं, जिन पर एडमिशन नहीं हुआ है. इस वजह से कट-ऑफ काफी कम चली गई है. ऐसा पहली बार नहीं है कि कॉलेज की सीटें खाली पड़ी हैं और ये हर साल होता है, जिसके बाद कट-ऑफ को कम किया जाता है.
लेकिन, सवाल ये है कि आखिर नीट-पीजी में हर साल इतनी सीटें खाली क्यों रहती है और क्यों इतनी कम कट-ऑफ होने के बाद भी एडमिशन नहीं लेते हैं. तो जानते हैं सीटें खाली रहने की वजह क्या है और किस वजह से कट-ऑफ इतनी कम रहती हैं...
प्राथमिकताओं का है पंगा
हजारों सीटों पर एडमिशन नहीं होने का मतलब ये नहीं है कि उम्मीदवार एडमिशन लेना ही नहीं चाहते हैं. दरअसल, हर कोई चाहता हैं कि उसे अपने हिसाब से कॉलेज और कैटेगरी मिली. जब एडमिशन शुरू होते हैं तो काउंसलिंग में सबसे पहले कट-ऑफ काफी ज्यादा रहती है. इसमें लोग सबसे ज्यादा सरकारी कॉलेज लेना चाहते हैं और अपने पसंद की स्पाइलेजेशन की डिमांड करते हैं. जैसे- Dermatology, Radiology, Ophthalmology की काफी डिमांड रहती है और सबसे पहले इनकी सीट भर जाती है.
कुछ स्पेशलिटी में ज्यादा डिमांड रहती है और बाकी स्पेशलिटी की सीटें अक्सर खाली रहती हैं. ऐसे में जिनका इन स्पेशलिटी में एडमिशन नहीं होता, वो दूसरे स्पेशलिटी में एडमिशन नहीं लेते हैं.
प्राइवेट कॉलेज से बनाते हैं दूरी













