
उत्तराखंड में साल 2020 की भर्ती का अब तक नहीं हुआ एग्जाम, इंतजाम करते रह गए उम्मीदवार
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अक्सर ये कहते हैं कि उनकी सरकार ने पिछले 5 सालों में 26,000 से ज्यादा नौकरियां दी हैं और ये नौकरियां पारदर्शिता व्यवस्था की वजह से मिल रही है. लेकिन क्या वाकई ये बात सच है? आज भी ऐसे युवा हैं जो अभी भी सरकारी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं.
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी अपने सख्त फैसले और अपने बयानों को लेकर अक्सर ही चर्चा में रहते हैं. एक बार फिर से वह सुर्खियों में बने हुए हैं और वजह है नर्सिंग रिक्रूटमेंट. साल 2020 में उत्तराखंड में निकली भर्ती आज भी हजारों उम्मीदवारों के लिए एक सपना ही बना हुआ है. सालों गुजर गए लेकिन परीक्षा का आयोजन नहीं हुआ. वहीं कई ऐसे युवा हैं, जिन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिली है और इंतजार करते-करते उनकी उम्र निकल रही है.
इसे लेकर आज तक ने नर्सिंग अभ्यर्थियों से बातचीत की है, जो 5 साल से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं. 12 साल के बाद 2020 में नर्सिंग अधिकारी के 3000 पदों के लिए भर्ती आई थी, जिसकी आज तक परीक्षा नहीं हो पाई है. 4500 से ज्यादा अभियार्थी निष्पक्ष भर्ती की मांग कर रहे हैं.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि उत्तराखंड में साल 2020 में नर्सिंग के पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जिसका मकसद सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में नर्सिंग स्टाफ की कमी को पूरा करना था. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों ने इस परीक्षा को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि उनकी ये तैयारी, प्रदशन में बदल जाएगी. ऐसा इसलिए क्योंकि आज तक इस भर्ती की परीक्षा हुई ही नहीं. तीन बार इस पेपर को कैंसिल कर दिया गया. लेकिन जब सरकार ने इस पद पर भर्ती निकाली तो, फिर से परीक्षा के जरिए भर्ती निकाली है जिसका विरोध उम्मीदवार लगातार कर रहे हैं. उन्हें वर्षवार परीक्षा का आश्वासन दिया लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई अपडेट नहीं है.
वर्षवार परीक्षा की हो रही है मांग
उम्मीदवारों ने ये भी बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री की ओर से इस बात का आश्वासन दिया गया था कि भर्ती अब साल दर साल आएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वर्षवार का मतलब है कि साल के हिसाब से यानी हर साल इन पदों पर भर्ती होगी और उम्मीदवारों की नियुक्ति इसके जरिए की जाएगी.

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