
गोल्डन ट्रायंगल और साइबर गुलामी... फर्जी नौकरी के जाल में फंस रहे भारतीय, टारगेट पूरा न होने पर दिए बिजली के झटके
AajTak
म्यांमार, कंबोडिया और लाओस के 'गोल्डन ट्रायंगल' में साइबर गुलामी का खतरनाक जाल फैल चुका है. भारतीय युवाओं को फर्जी जॉब ऑफर्स से फंसाकर साइबर क्राइम में धकेला जा रहा है. इंडिया टुडे की इन्वेस्टिगेशन टीम ने तीन पीड़ितों की डरावनी कहानियां सामने रखीं.
'गोल्डन ट्रायंगल'- म्यांमार, कंबोडिया और लाओस का इलाका, जो कभी ड्रग तस्करी के लिए बदनाम था, अब साइबर गुलामी का केंद्र बन गया है. चीनी माफिया के गिरोह आकर्षक नौकरियों का झांसा देकर युवाओं को फंसा रहे हैं. इंडिया टुडे की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने उन तीन भारतीयों की कहानी उजागर की है, जो इस खतरनाक जाल में फंसने के बाद किसी तरह बचकर लौटे हैं.
प्रदीप कुशवाहा के इंजीनियर से साइबर गुलाम बनने की कहानी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर निवासी प्रदीप कुशवाहा ने अक्टूबर 2023 में थाईलैंड के चियांग माई में एक इंडियन रेस्टोरेंट में मैनेजर की नौकरी शुरू की थी. लेकिन मई 2024 में उन्हें 40% सैलरी बढ़ाने का ऑफर मिला और एक इंटरव्यू के लिए माए सॉट बुलाया गया. 12 मई को जब वह पहुंचे तो दो हथियारबंद लोगों ने उनका अपहरण कर लिया. उन्हें जबरदस्ती म्यांमार ले जाया गया.
कैद में जिंदगी और अत्याचार
प्रदीप को एक बड़े कॉम्प्लेक्स में रखा गया, जहां हर तरफ हथियारबंद गार्ड्स थे. यहां उनका काम था भारतीय और अन्य देशों के लोगों को ऑनलाइन ठगना. प्रदीप ने कहा, 'अगर हम टारगेट पूरा नहीं करते, तो डंडों से पीटा जाता, बिजली के झटके दिए जाते.'
अपने देशवासियों को ठगने का गिल्ट इतना ज्यादा था कि प्रदीप ने चोरी-छिपे वीडियो रिकॉर्ड किया और अपने परिवार और भारतीय एम्बेसी को भेजा. लेकिन यह साहस महंगा पड़ा. उन्होंने बताया, '1 जुलाई से 20 जुलाई तक रोज मेरी पिटाई हुई. उन्होंने मेरे कमरे की तलाशी ली और वीडियो देखकर मुझे और ज्यादा यातना दी गई.'
आखिरकार परिवार ने 10 लाख रुपये की फिरौती चुकाकर उन्हें छुड़वाया. हालांकि, म्यांमार आर्मी की छापेमारी ने उनकी रिहाई सुनिश्चित की.

वेस्ट एशिया में छिड़ी जंग के बाद पैदा हुए हालातों पर प्रधानमंत्री लोकसभा को संबोधित कर रहे हैं. इस बीच उन्होंने कहा कि अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है. इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है. इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है.












