
खुशखबरी! अब BPSC में अभ्यर्थियों को तीन की जगह पांच मौके मिलेंगे
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बिहार लोक सेवा को ज्वाइन करने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों को अब प्रतियोगिता परीक्षा में बैठने के तीन की जगह पांच मौके मिलेंगे. बिहार कैबिनेट ने इस पर फैसला लेते हुए नया बदलाव किया है. साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेज में कंप्यूटर की पढ़ाई और सिंगल यूज प्लास्टिक को लेकर रखी गई मांग पर भी स्वीकृति मिली है.
बिहार सरकार की कैबिनेट में बीपीएससी छात्र, इजीनियरिंग कॉलेज और सिंगल यूज प्लास्टिक को लेकर रखी गई मांगों पर स्वीकृति मिली है. बीपीएससी के जरिए नौकरी की तैयारी कर रहे जनरल कैटेगरी के अभ्यर्थियों को अब तक तीन ही मौके मिलते थे. अब बीपीएससी में अभ्यर्थियों को तीन के बदले पांच मौके मिलेंगे. बिहार कैबिनेट ने इस पर फैसला लिया है.
बता दें कि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने बीपीएससी 68वीं संयुक्त प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा (BPSC 68th Prelims Exam) का नोटिफिकेशन काफी पहले जारी कर दिया था. जारी किए गए नोटिफिकेशन में आवेदन, योग्यता, आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और खाली पदों का विवरण समेत जरूरी जानकारी दी गई है. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आयोग (बीपीएससी) की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
20 दिसंबर आवेदन करने की आखिरी तारीख
बीपीएससी 68वीं कंबाइंड कॉम्पिटेटिव प्रीलिम्स एग्जाम (BPSC 68th CCE Pre Exam) के ऑनलाइन आवेदन 25 नवंबर 2022 से शुरू हुए थे. योग्य उम्मीदवार 20 दिसंबर 2022 तक आवेदन कर सकेंगे. एप्लीकेशन करेक्शन की लास्ट डेट 30 दिसंबर 2022 है.
सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर लगेगा जुर्माना
मुख्य सचिवालय में सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में कई ऐजेंडों पर मुहर लगी. जिसमें पटना की स्पोर्ट्स अथॉरिटी के सही संचालन के लिए बायलॉज के प्रारूप एवं प्रस्ताव पर स्वीकृति दी गई है. वहीं कैबिनेट ने बिहार नगरपालिका प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन मॉडल उपविधि 2022 की स्वीकृति दे दी है. बैठक में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर जुर्माना लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. घरेलू उपयोगकर्ता को 100 रुपये तो इसकी बिक्री पर 1500 का जुर्माना लगेगा. दूसरी बार और तीसरी बार पकड़े जाने पर जुर्माना राशि बढ़ती जाएगी. शहरी क्षेत्रों में यह नियम लागू होगा.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












