
क्या सबरीमाला मुद्दे का सीएम विजयन के चुनाव अभियान पर असर पड़ेगा?
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सबरीमाला मंदिर के मुद्दे पर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के एक मंत्री के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे को हवा देने की कोशिश कर रहे हैं.
कोविड महामारी से केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य पर आए संकट से निपटने में सरकार की कार्यकुशलता दिखाने का अवसर मिला बल्कि 2 जनवरी 2019 को सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश के बाद से सुलग रहे राजनीतिक विवाद से ध्यान हटाने में भी कामयाबी मिली. सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कि मंदिर मे सभी आयुवर्ग की महिलाएं जा सकती हैं, पुलिस की मदद से दो महिलाओं ने यहां प्रवेश किया था. बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में सात जजों की बेंच से यह तय करने को कहा था कि सिर्फ वर्षों पुरानी परंपरा का हवाला देकर क्या पूजास्थलों में प्रवेश से महिलाओं को वंचित किया जा सकता है. कई लोग मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के 2018 को लागू करने क्रम में पुलिस के दो महिलाओं को अपने संरक्षण में वहां प्रवेश कराने के प्लान को मंजूर देकर विजयन ने रणनीतिक भूल कर दी थी. तब चालीस के आसपाप की उम्र की बिंदु अम्मिनी और कनक दुर्गा को पुलिस संरक्षण में मंदिर के भीतर प्रवेश कराया गया था.More Related News

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