
कौन हैं वो लोग... मरने के बाद जिनके पांव नहीं जल पाते!
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नमक बनाने वाले मजदूरों के पैर मरने के बाद भी नहीं जलते हैं. तब उन्हें उसी नमक के साथ गड्ढे में गाड़ दिया जाता है. आखिर इन मजदूरों के पैरों पर आग का भी असर क्यों नहीं होता है. जानते हैं नमक मजदूरों की पूरी कहानी.
गुजरात में नमक बनाने वाले मजदूरों के शरीर का ये हाल हो जाता है कि आग से भी उनके पांव नहीं जल पाते. तब उनके शरीर के बचे हुए हिस्से को नमक के साथ ही गड्ढे में गाड़ दिया जाता है. ये नमक मजदूरों की त्रासदी है. लंबे समय तक इस काम में जुटे लोग अल्सर, स्किन कैंसर, आंखों की बीमारी, छाले जैसी परेशानियों से जिंदगी भर जूझते रहते हैं.
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के कच्छ में नमक बनाया जाता है. नमक बनाने वाले इन लोगों को अगरिया कहा जाता है. नमक बनाने वाले लोग पीढ़ियों से यही काम करते आए हैं. उनका कहना है कि उनके पास और कोई काम नहीं है.
कौन है अगरिया लोग नमक बनाने वाले इन मजदूरों की भी अलग त्रासदी है. मानसून खत्म होने के बाद ये अगरिया अपना घर छोड़ देते हैं. साल के 9 महीनें घर छोड़कर नमक बनाने के लिए ये गांधीधाम, जोगनीनार जैसे इलाकों में चले जाते हैं.
पीढ़ियों से नमक बना रहे हैं अगरिया समाज के लोग नमक बनाने वाले एक मजदूरों ने बताया कि उनके पिता भी नमक बनाते थे और उनके दादा भी यही काम करते थे. मैंने भी पांचवीं तक पढ़ाई की. फिर आगे कोई अच्छा काम नहीं मिलने पर मैंने भी नमक बनाना शुरू कर दिया. अब मेरे बेटे भी मेरे साथ यही काम करना पड़ता है.
बूट और दस्तानों के बिना करते हैं काम नमक बनाने वाले ने कहा कि इस काम से इतना पैसा नहीं आता है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकूं. इसलिए हमलोगों को नमक ही बनाना पड़ता है. नमक बनाने के दौरान आने वाले दुश्वारियों को लेकर उन्होंने बताया कि नमक की वजह से हमारे पांव खराब हो जाते हैं. हम बूट या जूता पहनते हैं लेकिन यह ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता है.
मरने के बाद भी नहीं जलते पैर नमक में काम करते-करते हमारे पैरों के चमड़े इतने मोटे हो जाते हैं कि ये मरने के बाद नहीं जलते हैं. मरने के बाद भी पांव बिना जले रह जाता है. फिर से गड्ढा करके उसमें नमक डालकर गाड़ना पड़ता है. इससे पहले ताउम्र नमक के छालों से जूझना पड़ता है.

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