
कोटा: नौ दिन लापता, फिर मृत मिला छात्र, मौत बनी पहेली, जंगल में जाकर क्यों दी जान? पुलिस के रोल से नाराज परिजन
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कोटा में आठ दिनों से अपने बेटे रचित को तलाश रहे परिजनों को नौंंवें दिन यानी सोमवार शाम को उसका शव जंगलों में मिला. परिजनों ने मंगलवार को आजतक से बातचीत में पुलिस के रोल पर भी सवाल उठाए.
राजस्थान कोटा में एक तरफ प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है और दूसरी तरफ छात्रों के सुसाइड का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. इस साल की शुरुआत में ही पांच छात्र अपनी जान दे चुके हैं. नौ दिन पहले लापता हुआ छात्र रचित का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. नौ दिन बाद रचित का शव गड़रिया महादेव मंदिर के पास जंगल में मिला है.
नौ दिन बाद जिस तरह जंगल में रचित का शव बरामद हुआ है, अब उसकी मौत एक पहेली बन गई है. अगर उसके भीतर सुसाइडल विचार आ रहे थे तो वो दूसरा रास्ता भी अपना सकता था, लेकिन घने जंगल में जाकर जान देना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है. बता दें कि रचित के कमरे में कुछ दिन पहले नोट्स मिले थे, जिन्हें देखकर पुलिस प्रशासन का अंदाजा है कि छात्र ने सुसाइड ही किया है. लेकिन रचित के परिजनों को सुसाइड के अलावा गेम टास्क का मामला भी नजर आ रहा है.
शिक्षा नगरी कोटा में नौ दिन से लापता कोचिंग छात्र रचित का शव परिजनों को गडरिया महादेव मंदिर के जंगल में मिला है. परिजन नौ दिन से लगातार इस जंगल में छात्र की तलाश कर रहे थे. मध्य प्रदेश से कोटा आकर करीब 50 से 60 लोग रोज जंगल में तलाश कर रहे थे. इस केस में पुलिस की बड़ी नाकामी सामने आई है कि कोटा पुलिस 9 दिन में भी कोचिंग छात्र को नहीं ढूंढ़ पाई और परिजनों में घने जंगल में जहां जंगली जानवरों के बीच छात्र को ढूंढ़ निकाला है.
घरवालों ने उठाए पुलिस पर भी सवाल
परिजनों ने आजतक से बातचीत में बताया कि हमें अभी भी अपने बच्चे की मौत का सही कारण नहीं पता. उसके दिमाग में क्या चल रहा था, वो क्या सोचकर वहां जगल गया, इसका किसी को नहीं पता. उन्होंने पुलिस के रोल पर कहा कि हमने पुलिस से मदद मांगी थी और कहा था कि आप जंगल में नीचे की तरफ भी खोजिये, रोज एक ही जगह ढूंढने से थोड़े ना मिलेगा तो जवाहर नगर थाना अधिकारी वासुदेव ने मना कर दिया.
उन्होंने कहा कि न तो मैं नीचे जाऊंगा और ना ही मेरा कोई सिपाही नीचे जाएगा. परिजनों ने कहा कि हम लोग आप लोगों के साथ चल लेंगे आप चलिए तो सही पर थाना अधिकारी ने साफ मना कर दिया था. उसके बाद परिजनों ने कहा किया घना जंगल है, जंगली जानवर हैं तो आप एक सिपाही भेज दीजिए हमारे साथ जो हथियार बंद हो. हमें जंगली जानवरों से कोई खतरा नहीं रहे. हम नीचे जाकर ढूंढ़ लेंगे पर पुलिस की तरफ से कोई मदद नहीं मिली. उसके बाद उदास परिजन नीचे की ओर बढ़े और उनको अपने बच्चों की बॉडी एक पेड़ में फंसी हुई मिली. उसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी कि उनको बॉडी मिल गई है. उसके बाद पुलिस पहुंची बॉडी को वहां से चंबल नदी में बोट की मदद से लेकर आई.

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