
कैसे इतना शक्तिशाली हो गया था रावण? ज्योतिषाचार्य ने समझाया जन्मकुंडली का पूरा गणित
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विश्रवा की दूसरी पत्नी दैत्यराज सुमाली की पुत्री कैकसी थी. रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और सूर्पणखा इन्हीं की संतानें थीं. ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय भांबी कहते हैं कि रावण दो अलग संस्कृतियों की संतान था और इसीलिए ये अद्वितीय है और महाशक्तिशाली था.
रावण दुनिया का सबसे बड़ा पंडित, महाविद्वान और महा अभिमानी था. ब्रह्माजी के पुत्र पुलस्त्य ऋषि थे और उनके पुत्र का नाम विश्रवा हुआ. विश्रवा की दो पत्नियां थीं. उनकी पहली पत्नी भारद्वाज की पुत्री देवांगना थी जिसका पुत्र कुबेर था. विश्रवा की दूसरी पत्नी दैत्यराज सुमाली की पुत्री कैकसी थी. रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और सूर्पणखा इन्हीं की संतानें थीं. ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय भाम्बी कहते हैं कि रावण दो अलग संस्कृतियों की संतान था और इसीलिए ये अद्वितीय है और महाशक्तिशाली था. रावण को शास्त्रों की बहुत जानकारी थी. वो वेदों का ज्ञाता था. ग्रहों से लेकर वनस्पति जगत की छोटी से छोटी बात उसके दिमाग में समाई थी और जब किसी की जानकारी का स्तर इतना बढ़ जाता है तो वो महा अभिमानी हो जाता है. रावण का अहंकार ही उसका एकमात्र दोष था. आइए आज आपको रावण की कुंडली और उसके चरित्र के बारे में बताते हैं. रावण की कुंडली सिंह लग्न की कुंडली है. सूर्य सिंह लग्न का स्वामी होता है और इसी कारण रावण बेहद शक्तिशाली था. सूर्य के साथ यहां बृहस्पति भी है. बृहस्पति यहां पंचम और अष्टम भाव का स्वामी है. पंचम भाव में बृहस्पति के होने से रावण किसी पूर्व जन्म के कारण पैदा होता है. जबकि कुंडली के अष्टम भाव में गुरु की उपस्थिति इंसान को गुप्त विद्याओं का मालिक बनाती है.
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