
इजरायली हमले में ईरान को बड़ी चोट, 9 वैज्ञानिक समेत 6 टॉप कमांडरों की मौत
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ईरान एटम बम बनाने की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है. ऐसे में इजरायल और अमेरिका नहीं चाहते हैं कि ईरान परमाणु शक्ति वाला देश बने. लिहाजा ईरान पर सबसे बड़ी एयर स्ट्राइक शुरू की गई और पहले फेज़ में ईरान के टॉप कमांडरों को निशाना बनाया गया.
इजरायल (Israel) ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर 9 ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों और करीब 6 शीर्ष IRGC कमांडरों को मार गिराने की पुष्टि की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में, IDF प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने खुलासा किया कि सेना ने करीब 6 टॉप ईरानी सैन्य कमांडरों और 9 परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया.
सैन्य अधिकारियों में ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद बाघेरी, IRGC प्रमुख हुसैन सलामी, खतम-अल अंबिया सेंट्रल मुख्यालय के प्रमुख घोलम अली राशिद, IRGC वायु सेना प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अमीर अली हाजीजादेह, IRGC वायु सेना ड्रोन यूनिट कमांडर ताहिर पोर और IRGC वायु सेना वायु रक्षा यूनिट कमांडर दावूद शेखियन शामिल हैं.
इजरायल ने ईरान पर क्यों हमला किया?
ईरान एटम बम बनाने की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है. ऐसे में इजरायल और अमेरिका नहीं चाहते हैं कि ईरान परमाणु शक्ति वाला देश बने. लिहाजा ईरान पर सबसे बड़ी एयर स्ट्राइक शुरू की गई और पहले फेज़ में ईरान के टॉप कमांडरों को निशाना बनाया गया.
इस हमले में ईरान के टॉप 4 मिलिट्री कमांडर समेत 20 सैन्य अफसर मारे गए. इनमें ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कमांडर हुसैन सलामी मारे गए हैं. ईरान के आर्मी चीफ मोहम्मद बाघेरी भी इजरायल के हमले में मारे गए हैं. बघेरी ईरान की सेना के सबसे प्रमुख स्तंभ थे. इजरायली हमले में सुप्रीम लीडर खामेनेई के शीर्ष सलाहकार अली शमखानी को भी निशाना बनाया गया. शमखानी ईरान की कूटनीति का एक उभरता हुआ चेहरा थे.
इजरायल ने 5 फेज में किए हमले

ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले को लेकर मचे घमासान के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कल मीडिया के सामने आकर युद्ध को लेकर कई बड़ी बातें कहीं नेतन्याहू ने ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका को घसीटने की फर्जी खबरों का खंडन किया. कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति हमेशा वही निर्णय लेते हैं जो उन्हें अमेरिका के हित में लगता है. उन्होंने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान इजरायल और अमेरिका के तालमेल की भी प्रशंसा की.

जिस ईरान को बर्बाद करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप निकले थे. अब लगता है कि उनका पैर उसी ईरान के 'तेल' पर फिसल गया है. और इसलिए वो एक बार फिर पूरी दुनिया को 'चौंकाने' वाला फैसला ले सकते हैं. और ये फैसला ईरान के तेल की Sale से जुड़ा है. ईरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने और हर चीज के लिए 'मोहताज' बनाने की कोशिश करने वाले ट्रंप अब खुद ईरान के तेल से प्रतिबंध हटा सकते हैं. और तेल की Sale करने की अनुमति दे सकते हैं? अब सवाल ये है कि जब ट्रंप खुद ईरान के तेल की बिक्री के लिए तैयार हैं, तो वो ईरान से युद्ध क्यों लड़ रहे हैं? क्या वाकई ईरान ने ट्रंप को ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया है, या ट्रंप अपने ही फैसलों की फांस में फंस चुके हैं?











