
तेल, सत्ता और तख्तापलट... लोकतंत्र के नाम पर डोनाल्ड ट्रंप की तानाशाही राजनीति का पूरा विश्लेषण
AajTak
ट्रंप खुद को लोकतंत्र का रक्षक बताते हैं, लेकिन उनके फैसले तानाशाही सोच की ओर इशारा करते हैं. वेनेजुएला में राष्ट्रपति को अगवा करना, ईरान में खुलेआम शासन बदलने की धमकी देना और चुनाव हारने के बाद नतीजों को न मानना, ये सभी कदम लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े करते हैं.
दुनिया का सबसे शक्तिशाली मुल्क का राष्ट्रपति आज सारे अंतरराष्ट्रीय कानूनों से ऊपर जाकर बैठ गया है. वह ख़ुद को लोकतंत्र का रक्षक बताता है और मानवाधिकार की भाषा का भी इस्तेमाल करता है. लोकतंत्र बचाने का हवाला देते हुए बिना किसी मंजूरी के दूसरे देश के राष्ट्रपति को अगवा कर लेता है तो किसी देश पर बमबारी कर देता है. इतना ही नहीं, चुनाव परिणाम उसके पक्ष में नहीं आया तो नतीजों को भी मानने से इंकार कर देता और उनके समर्थक संसद तक पहुंच जाते हैं.
यहां बात हो रही डोनाल्ड ट्रंप की. आप ऐसे नेता को क्या कहेंगे? एक मज़बूत नेता या फिर वो नेता जो सबसे ज्यादा लोकतंत्र से डरता हो? ट्रंप ख़ुद को तानाशाहों का विरोधी हमेशा से बताते आए हैं. लेकिन, हाल के दिनों में देखें तो उनके कई फैसलों को एक साथ रखेंगे तो आपके सामने एक असहज तस्वीर बनकर आएगी. तस्वीर ऐसी कि ट्रंप लोकतंत्र की भाषा तो बोलते हैं. लेकिन फैसले किसी तानाशाही की तरह लेते हैं.
सबसे ताजा मामले देखें तो वेनेजुएला में जो ट्रंप ने किया उसे देख दुनिया तो चौंकी ही, अमेरिकावासी भी चौंक गए. किसी ने सोचा भी नहीं था कि अमेरिकी सेना वेनेजुएला में दाखिल होंगे और ताक़त के दम पर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठाकर ले आए. किसी देश के राष्ट्रपति को दूसरे देश की सेना एक रात उठाकर ले जाए ये अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाना नहीं तो क्या है. इतना ही नहीं, ट्रंप के इस फैसले से तो वहां के नेता लोग भी बड़े स्तर पर अनजान थे. इस कार्रवाई से पहले संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी तक नहीं ली गई.
एक संप्रभु देश की सत्ता अमेरिका में बैठा एक शख्स यूहीं बदल देता है. अगर मान भी लें कि मादुरो तानाशाह थे तो क्या उन्हें हटाने का अधिकार अमेरिका को था. अधिकार था तो वेनेजुएला की जनता का. लेकिन, फैसला जनता ने नहीं किया. बल्कि पड़ोसी मुल्क में बैठा दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति ने किया.
लोकतंत्र या तेल: असली सवाल यहीं छुपा है
वेनेजुएला में ट्रंप के खेल के पीछे साफ़ तौर से तेल है. लंबे समय से अमेरिका की नज़र वेनेजुएला की तेल पर रही है. वेनेजुएला के सबसे दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. मध्य पूर्व में स्थित देशों से भी ज्यादा. वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल तेल का भंडार है. ये तेल का भंडार इतना है कि किसी भी वैश्विक ताक़त की नज़र टिक जाए.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.

ईरान ने पहली बार अपनी घातक मिसाइल सेजिल का इस्तेमाल कर इजरायल पर हमला किया है. इस हमले से ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ 54वां चरण शुरु कर दिया है. IRGC के ऐरोस्पेस प्रमुख ने बताया कि सेजिल मिसाइल से कमांड और कंट्रोल केंद्रों पर मला किया. इस मिसाइल में ईरान के अंदर से इजरायल को निशाना बनाने की पूरी क्षमता है.









