
कभी डकैती, कभी हमले, अब पैरोल पर रहते हुए हत्या... लंबे आपराधिक रिकॉर्ड वाला है शिवांक अवस्थी का मुजरिम
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कनाडा में भारतीय शख्स शिवांक अवस्थी की हत्या करने वाले मुजरिम का आपराधिक रिकॉर्ड लंबा रहा है लेकिन इस देश का सिस्टम सुधार और बेहतर व्यवहार की उम्मीद में उसे बार-बार खुले आम छोड़ता रहा.
23 दिसंबर 2025 की दोपहर कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टोरोंटो में शिवांक अवस्थी पढ़ाई से जुड़े काम के लिए कैंपस आया था. उसे क्या पता था कि यह दिन उसकी ज़िंदगी का आखिरी दिन बन जाएगा और वो बेवजह आपराधिक मामलों में लिप्त बाबतंडे अफुवापे का निशाना बन जाएगा. दोपहर करीब 3:30 बजे, स्कारब्रो इलाके के हाईलैंड क्रीक ट्रेल और ओल्ड किंग्स्टन रोड के पास गोलियों की आवाज़ गूंजी. शिवांक को गोली मार दी गई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई.
पुलिस ने शुरुआती तौर पर इसे “अचानक हमला” बताया, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो तस्वीर बदलने लगी. डिटेक्टिव सार्जेंट स्टेसी मैककेब ने साफ कहा—यह हमला सुनियोजित और जानबूझकर किया गया था. उनके मुताबिक, हमला करने वाला किसी को निशाना बनाना चाहता था. गोली मारने वाला शख्स कनाडाई नागरिक बाबतंडे अफुवापे था, जिसका अतीत हिंसा और अपराध से भरा है.
अपराध की परत-दर-परत
अफुवापे का जब रिकॉर्ड चेक किया गया तो अपराध की परत-दर-परत खुलती चली गईं. इससे सवाल ये उठता है कि लंबे आपराधिक रिकॉर्ड वाला शख्स खुलेआम सड़कों पर कैसे घूम रहा था. इतना खतरनाक शख्स को पैरोल क्यों दी गई थी.
अफुवापे की जवानी ही नहीं बचपन भी कोई खास साफ-सुथरा नज़र नहीं आता. पैरोल बोर्ड के दस्तावेज बताते हैं कि अफुवापे की ज़िंदगी शुरू से ही अस्थिर रही. लगभग 10 साल की उम्र में उसके माता-पिता अलग हो गए. वह कभी मां के साथ रहा, कभी पिता के साथ. 15 साल की उम्र में उसने मारिजुआना पीना शुरू किया. नशे की आदत बढ़ती गई और इसी के चलते उसने 12वीं कक्षा में ही स्कूल छोड़ दिया. बाद में किसी तरह हाई स्कूल डिप्लोमा पूरा किया.
2019 में उसने सिविल इंजीनियरिंग के फुल-टाइम कोर्स में दाखिला लिया. पहला सेमेस्टर ठीक-ठाक रहा, लेकिन कोविड लॉकडाउन के दौरान दूसरे सेमेस्टर में पढ़ाई भी छूट गई. पढ़ाई की तरह ही ये शख्स नौकरी में भी टिक नहीं पाया. कभी बेकरी में एक महीना, कभी मैकडॉनल्ड्स में एक हफ्ता, कभी फैक्ट्री में, जहां उसने पहले ही दिन में काम छोड़ दिया.

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