
क्या ईरान में अब खामेनेई का तख्तापलट होने वाला है? देखें
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रणभूमि में इरान में बढ़ती हिंसा और प्रदर्शनकारियों के संघर्ष पर चर्चा की गई. आर्थिक संकट और महंगाई के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत हुई है जबकि सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया है. अमेरिका, इजराइल और रूस के बीच तनाव बढ़ रहा है, विशेषकर तेल के मुद्दे पर टकराव. इन सभी घुमावदार मुद्दों पर रणभूमि स्पेशल में विस्तृत विश्लेषण पेश किया गया.

लंबे समय बाद दुनिया एक ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति को देख रही है जिनके रणनीतिक फैसले ही नहीं शारीरिक भाव भंगिमाएं भी लोगों को अचरज में डाल रही है. डोनाल्ड ट्रंप की कारगुजारियां आज फैमिली गपशप का हिस्सा बन गई हैं. क्या ट्रंप का बिहैवियर किसी चीज से प्रभावित हो रहा है. आपको बता दें कि 79 साल के ट्रंप अपने दिल का ख्याल रखते हुए वर्षों से एस्पिरिन की गोली का ओवरडोज ले रहे हैं.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हिंसा तेज होती दिख रही है. टाइम मैगजीन से बातचीत में एक ईरानी डॉक्टर ने दावा किया कि सिर्फ राजधानी तेहरान के केवल छह अस्पतालों में अब तक कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें अधिकतर गोली लगने से मरे हैं. देशभर में इंटरनेट बंदी और सख्त कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शन सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं.

ईरान के लिए आज की रात भारी हो सकती है. निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी ने राष्ट्रपति ट्रंप से तत्काल मदद की मांग की है उन्होंने कहा है कि ईरान में ब्लैकआउट है और इस ब्लैकआउट का इस्तेमाल अली खामेनेई की सरकार युवा क्रांतिकारियों को मारने के लिए कर रही है. उन्होंने कहा है कि कुछ ही देर में लोग सड़कों पर होंगे.

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने हाल ही में बढ़ रहे आंदोलन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर पहली बार सीधे हमले किए हैं. देश के नाम अपने संबोधन में खामेनेई ने कहा कि ट्रंप का भी अंत होगा. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ईरानी जनता दूसरे देश के नेताओं को खुश करने के लिए सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इधर, ईरानी जनता और सरकार के बीच जारी गतिरोध के कारण देश में आंदोलन तेज हुए हैं, जो राजनीतिक बदलाव की ओर संकेत कर सकते हैं.

ईरान को इस्लामी रिपब्लिक और कट्टरपंथ रास नहीं आया. आर्थिक तबाही, महिलाओं का दमन, भ्रष्टाचार आदि ने लोगों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है. ईरानी लोग सड़कों पर उतरकर 'तानाशाह मुर्दाबाद... इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद... ना गाजा ना लेबनान के लिए, मेरी जिंदगी ईरान के लिए...' जैसे नारे लगा रहे हैं.








