
आठ साल के शासन में कितना विकास कर पाए मोदी? : आज का दिन
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नरेंद्र मोदी के आठ सालों की सत्ता में आपके हाथ क्या आया?, पंजाब में C और D ग्रुप की भर्ती के लिए क्यों ज़रूरी की जा रही पंजाबी भाषा? क्या दूसरे क्वालिफ़ायर में राजस्थान पर भारी पड़ेगी बेंगलुरू?, सुनिए 'आज का दिन' अमन गुप्ता के साथ.
नरेंद्र मोदी के आठ सालों की सत्ता में आपके हाथ क्या आया?, पंजाब में C और D ग्रुप की भर्ती के लिए क्यों ज़रूरी की जा रही पंजाबी भाषा? क्या दूसरे क्वालिफ़ायर में राजस्थान पर भारी पड़ेगी बेंगलुरू?, सुनिए 'आज का दिन' अमन गुप्ता के साथ.
कैसे रहे मोदी के 8 साल?
60 महीनों की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में आठ साल हो चुके हैं. 2014 लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले नरेंद्र मोदी को बीजेपी की तरफ से पीएम उम्मीदवार चुनने की कहानी 16 मई 2014 को उनके पीएम बनने पर ख़त्म हुई थी. अच्छे दिन आने वाले हैं का नारा अच्छे दिन आ गए है में बदल गया था . लगातार दो टर्म, नरेंद्र मोदी पीएम चुने गए और अब आगे 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी ने कमर कसनी अभी से ही शुरू की दी है. हाल ही में जयपुर में बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं की बैठक हुई जिसमें आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए ब्लूप्रिंट तैयार किया गया. और अब 30 मई से 14 जून तक बीजेपी देशभर में अपने इन आठ सालों का जश्न मनाएगी और कोशिश करेगी कि जो उन्होंने काम किए हैं, उन्हें जनता तक पहुंचाया जाए. जानकार बताते हैं कि इन आठ सालों में बीजेपी की पॉलिटिक्स भी बहुत चेंज हुई है. खासकर के 2019 में वापस सत्ता में आने के बाद जब अमित शाह ने गृह मंत्रालय का कमान संभाली तो बीजेपी की अटैकिव पॉलिटिक्स को और ज्यादा बल मिला, और इसी का कारण था कि 5 अगस्त 2019 को जब आर्टिकल 35 ए को खत्म किया गया और आर्टिकल 370 के कई प्रावधानों को हटा दिया तो बीजेपी ने इस फैसले पर अपनी खूब पीठ थप-थपाई. मगर जब वक्त आगे बढ़ा तो वही धारा 370 पर पीठ थपथपाने वाली वही सरकार, फॉर्म लॉ और राजद्रोह कानून पर झुकती भी नज़र आई. सो आज बीजेपी के सत्ता में इन्हीं आठ सालों पर थोड़ी तफसील से बात करेंगे. सबसे पहले बात मोदी सरकार के पॉलिसीज़ की करते हैं. और इसे अगर हम 2014 से 2019 यानी की पहले कार्यकाल और 2019 से लेकर अबतक यानी की दूसरे कार्यकाल में तोड़े तो ये दोनों कार्यकाल एक दूसरे से कितने अलग नज़र आते हैं?
क्यों C और D ग्रुप की भर्तियों में पंजाबी भाषा ज़रूरी कर रही मान सरकार?
सत्ता में आने के बाद से ही पंजाब की आप सरकार अपने कई निर्णयों को लेकर चर्चा में है. कभी किसानों के मुद्दों पर तो कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने फैसले के लिए. अब सरकार के एक और फैसले की चर्चा हो रही है. दरअसल, पंजाब सरकार ने सरकारी नौकरी के लिए पंजाबी भाषा अनिवार्य कर दिया है जिसमें ग्रुप सी के क्लेरिकल स्टाफ आएगें. वहीं डी के चपरासी, सफाई कर्मचारी जैसे क्लास फोर कर्मचारी शामिल हैं. सरकार ने कहा है कि इन दोनों पोस्ट के लिए पंजाबी योग्यता टेस्ट में कम से कम 50 फीसदी मार्क्स लाने जरूरी होंगे. तो इन्हीं सब को देखते हुए ऐसा कहा जा रहा है कि पंजाब सरकार के इस आदेश से सी और डी ग्रुप के पदों पर पंजाबी मूल या फिर स्कूलों में पंजाबी पढ़ने वालों को नौकरी के ज्यादा मौके मिल सकेंगे. एक बात और गौर करने वाली है कि मान सरकार 26 हज़ार से ज्यादा पदों पर सरकारी भर्ती कर रही है. तो इस लिहाज से यह भी इसे बड़ा फैसला बताया जा रहा है. वहीं इनमें से कई पदों की भर्तियां निकाली जा चुकी हैं तो कई के विज्ञापन आने बाकी हैं. तो अब सवाल यहां ये है कि जिन सी और डी ग्रुप के लिए पंजाबी भाषा को अनिवार्य किया गया है, क्या उसकी मांग पंजाबी लोगों ने की है, इस मसले पर वहां के लोगों की क्या राय है?
दूसरे क्वालिफ़ायर में राजस्थान पर भारी पड़ेगी बेंगलुरू?

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