
Vastu Tips: घर में बार-बार परेशानियां? हो सकता है भूमि दोष, जानिए उपाय और लक्षण
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Vastu Tips: भूमि दोष वास्तु शास्त्र का एक प्रमुख दोष है, जो किसी घर या भूमि की ऊर्जा असंतुलन से उत्पन्न होता है. ऐसा माना जाता है कि जिस भूमि पर घर बनाया गया हो, यदि वह अशुद्ध, असंतुलित या नकारात्मक ऊर्जा से बाधित हो, तो वहां रहने वाले लोगों के जीवन में लगातार समस्याएं आती हैं.
Bhumi Dosh Upay : वास्तु शास्त्र में कई प्रकार के दोषों का जिक्र मिलता है, जिनका सीधे तौर पर घर के वातावरण, परिवार के स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति पर प्रभाव पड़ता है. इन्हीं में से एक प्रमुख भूमि दोष है. माना जाता है कि जिस स्थान पर घर बनाया जा रहा हो, या जिस जमीन का चयन किया गया हो, यदि वह भूमि किसी तरह से अशुद्ध, असंतुलित या ऊर्जात्मक रूप से बाधित हो, तो उस घर में रहने वाले लोगों के जीवन में लगातार समस्याएं उत्पन्न होती रहती हैं.
वास्तु शास्त्र में भूमि की तीन अवस्थाएं मानी जाती हैं. जागृत भूमि सबसे शुभ, प्रगति और सफलता देने वाली मानी जाती है. सुप्त भूमि सामान्य प्रभाव वाली, मध्यम फल देने वाली मानी जाती है. मृत भूमि अशुभ मानी जाती है, घर में रुकावटें, तनाव और आर्थिक बाधाएं बढ़ाती है.
भूमि की अवस्था कैसे पता चलती है? भूमि की प्रकृति का पता जन्म कुंडली देखकर लगाया जाता है. विशेषकर शनि और गुरु (बृहस्पति) के गोचर से भूमि की ऊर्जा प्रभावित होती है.
मृत भूमि का प्रभाव: मृत भूमि घर की तरक्की रोकती है, सुख व शांति में बाधा डालती है और बार-बार दिक्कतें पैदा करती है.
भूमि दोष के प्रमुख लक्षण
पालतू पशुओं का बार-बार बीमार पड़ना या असमय मृत्यु होना: जिस घर में भूमि दोष होता है, वहां पालतू जानवरों पर इसका सीधा प्रभाव दिखाई देता है. गाय, कुत्ता, बिल्ली जैसे पालतू पशु अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के बीमार रहने लगते हैं. कई बार उनकी असमय मृत्यु भी हो जाती है. यह संकेत माना जाता है कि घर की भूमि में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय है.

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