
T20 World Cup 2026 में ICC की 'सेटिंग' ने जिम्बाब्वे का जोश और खेल दोनों बिगाड़ दिया
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टी-20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे ने वो कर दिखाया जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. मैदान पर पसीना बहाकर उन्होंने टॉप की कुर्सी हासिल की, लेकिन ICC के किताबी नियमों ने उनके हक पर डाका डाल दिया. पेश है इस नाइंसाफी पर एक तीखी चोट.
कहते हैं कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, लेकिन ICC ने इसे 'निश्चितताओं' का धंधा बना दिया है. जिम्बाब्वे की टीम ने इस वर्ल्ड कप में जो किया, उसे देखकर बरबस ही फिल्म लगान का वो डायलॉग याद आता है- 'तुम जीते तो दोगुना लगान माफ, और हम जीते तो...' लेकिन यहां तो जिम्बाब्वे जीत गया, फिर भी उसे इनाम के बदले 'पुराना हिसाब' थमा दिया गया. जब जिम्बाब्वे ने मैदान पर ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को धूल चटाई और अपने ग्रुप में सीना तानकर टॉप पर रहा, तो दुनिया को लगा कि अब इस 'जायंट किलर' को उसका हक मिलेगा. कायदे से ग्रुप टॉपर को सुपर-8 में कुछ सहूलियत मिलनी चाहिए थी, लेकिन ICC की 'प्री-सीडिंग' वाली फाइल ने खेल शुरू होने से पहले ही जिम्बाब्वे की किस्मत लिख दी थी.
ICC का ये 'प्री-सीडिंग' सिस्टम किसी पुराने ढर्रे की सरकारी फाइल जैसा है. इन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि 'X1' इंडिया होगा और 'X2' ऑस्ट्रेलिया. अब चाहे जिम्बाब्वे खून-पसीना एक करके टॉप पर आ जाए, उसे 'X2' की ही जर्सी पहननी पड़ेगी.
क्योंकि ब्रॉडकास्टर्स को डर है कि अगर शेड्यूल बदला तो विज्ञापन के रेट गिर जाएंगे. ICC का तर्क साफ रहता है - लॉजिस्टिक्स, ब्रॉडकास्ट कमिटमेंट्स और फैन्स की सुविधा. बड़े टूर्नामेंट महीनों पहले प्लान होते हैं- टिकट, वेन्यू, ट्रैवल, टीवी स्लॉट सब फिक्स रहते हैं. ऐसे में X1, Y1 जैसे स्लॉट अक्सर टूर्नामेंट से पहले ही तय कर दिए जाते हैं.
यह तो वही बात हुई कि क्लास में टॉप कोई और करे, और मेडल उस लड़के को मिले जो पहले से 'फेवरेट' था. जिम्बाब्वे के साथ यह बर्ताव सिर्फ एक टीम के साथ नाइंसाफी नहीं है, बल्कि उस जज्बे का अपमान है जो छोटी टीमें बड़े मंच पर लेकर आती हैं.
जिम्बाब्वे का यहां तक पहुंचना कोई तुक्का नहीं है. पिछले कुछ सालों में इस टीम ने वो मंजर देखे हैं जो किसी भी क्रिकेट बोर्ड की कमर तोड़ दें. कभी बोर्ड सस्पेंड हुआ, तो कभी फंड्स की कमी से खिलाड़ियों के पास जूते तक नहीं थे. 2024 के वर्ल्ड कप में तो ये टीम क्वालिफाई तक नहीं कर पाई थी. युगांडा जैसी टीम से हारकर बाहर होना किसी सदमे से कम नहीं था. लेकिन 'मुकद्दर का सिकंदर' रजा और उनकी टोली ने हार नहीं मानी. मुजराबानी की रफ्तार और ब्रायन बेनेट जैसे युवाओं ने दिखा दिया कि जब पेट खाली हो और सीने में आग, तो दुनिया की बड़ी से बड़ी टीम बौनी नजर आती है. ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को उन्हीं के घर जैसे माहौल में हराना बताता है कि ये टीम अब सिर्फ 'भागीदारी' करने नहीं, बल्कि 'राज' करने आई है.
शायरी की जुबान में कहें तो:

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत से हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. मोहम्मद आमिर ने 90 के दशक वाली टीम से तुलना करते हुए मौजूदा स्क्वॉड पर सवाल उठाए. शाहिद आफरीदी ने बड़े बदलाव की मांग की, जबकि शादाब खान ने प्रदर्शन से जवाब दिया. अब शादाब के बयान पर बासित अली भड़क उठे हैं.

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर शादाब खान और मोहम्मद नवाज ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम के फाइनल तक पहुंचने का भरोसा जताया है. सेमीफाइनल तक पहुंचने के सवाल पर दोनों ने साफ कहा कि लक्ष्य सिर्फ फाइनल है. टीम दबाव में जरूर है, लेकिन खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बताता है कि पाकिस्तान अभी भी वापसी की उम्मीद जिंदा रखे हुए है.

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