
Surya Grahan 2025: 15 दिनों में 2 ग्रहण, 21 सितंबर से बढ़ सकती है इन 3 राशियों की मुसीबत
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Surya Grahan 2025: 15 दिन के अंतराल में दो ग्रहण लगने की घटना को ज्योतिषविद अशुभ मान रहे हैं. 7 सितंबर को कुंभ राशि में चंद्र ग्रहण लगा था और अब 21 सितंबर को कन्या राशि में सूर्य ग्रहण लगने वाला है. 15 दिन के भीतर 2 ग्रहण तीन राशियों के लिए बहुत अशुभ माने जा रहे हैं.
Surya Grahan 2025: 21 सितंबर को साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है. यह सूर्य ग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. आगामी सूर्य ग्रहण सर्वपितृ अमावस्या के संयोग में भी लग रहा है. हालांकि 15 दिन के अंतराल में 2 ग्रहण लगने की घटना को ज्योतिषविद अशुभ मान रहे हैं. 7 सितंबर को कुंभ राशि में चंद्र ग्रहण लगा था और अब 21 सितंबर को कन्या राशि में सूर्य ग्रहण लगने वाला है. 15 दिन के भीतर 2 ग्रहण तीन राशियों के लिए बहुत अशुभ माने जा रहे हैं.
कन्या- 21 सितंबर को कन्या राशि में साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने वाला है. इसलिए इसी राशि पर ग्रहण का सर्वाधिक प्रभाव रहने वाला है. आय के स्रोत प्रभावित हो सकते हैं. धन हानि की प्रबल संभावनाएं हैं. उधार या निवेश की गई राशि डूब सकती है. पैतृक संपत्ति के मामले में भी आपको झटका सकता है. इस दौरान आर्थिक मोर्चे पर बहुत सावधानी के साथ निर्णय लेने की आवश्यकता है.
कुंभ- 7 सितंबर का चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में ही लगा था. शनि के स्वामित्व वाली कुंभ राशि पर ग्रहण की दोहरी मार होगी. कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का तीसरा चरण भी चल रहा है. ऐसे में आपको आकस्मिक धन हानि हो सकती है. अचानक दुर्घटना के भी संयोग बनते दिख रहे हैं. वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. कार्यस्थल पर हुई एक छोटी सी गलती आप पर भारी पड़ सकती है.
मीन- इस वक्त शनि मीन राशि में विराजमान हैं और साढ़ेसाती का तीसरा चरण आपकी राशि पर चल रहा है. 15 दिन में 2 ग्रहण मीन राशि के लिए बिल्कुल ठीक नहीं हैं. ये दुर्लभ संयोग पति-पत्नी के रिश्ते में खटास डाल सकता है. नौकरी-व्यापार में बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. कारोबार नुकसान में हो सकता है. आय प्रभावित हो सकती है. धनधान्य की कमी से मन चिंतित रहेगा.
क्या सूर्य ग्रहण का सूतक मान्य होगा?
21 सितंबर का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने वाला है. इसलिए न तो इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा और न ही पूजा-पाठ या अन्य दैनिक कार्य प्रभावित होंगे. सूर्य ग्रहण पर सर्वपितृ अमावस्या का संयोग भी बन रहा है. हालांकि जातक निश्चिंत होकर अपने पितरों का श्राद्ध और पिंडदान कर सकेंगे. इसमें किसी तरह की कोई बाधा नहीं रहेगी.

Chalisa Yog: ज्योतिष शास्त्र में चालीसा योग उस स्थिति को कहा जाता है जब दो ग्रह आपस में 40 अंश (डिग्री) की दूरी पर स्थित होते हैं. इस योग का नाम ही “चालीसा” है, क्योंकि इसका संबंध 40 अंश के अंतर से होता है. चालीसा योग का प्रभाव हर राशि पर समान नहीं होता. यह ग्रहों की स्थिति, भाव और व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है कि यह योग शुभ फल देगा या सावधानी की जरूरत पैदा करेगा.

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