
Pakistan Political Crisis: इमरान खान की आखिरी 'उम्मीद', कम वोट पाकर भी ऐसे बच सकती है सरकार
AajTak
Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान में इमरान खान के पास अपनी कुर्सी बचाने का एक रास्ता अब भी बचा हुआ है. इमरान ने उसका दांव चल दिया है. अगर 3 अप्रैल को विपक्ष 172 वोट हासिल नहीं कर पाया तो इमरान की कुर्सी बची रहेगी.
Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार संकट में आ गई है. इमरान की अपनी ही पार्टी के दो दर्जन विधायक बागी हो गए हैं. सहयोगियों ने भी साथ छोड़ दिया है. इसके बाद अब इमरान की सरकार संसद में नंबर गेम में फंसती दिख रही है. हालांकि, इमरान के पास अब भी एक रास्ता है जिससे उन्हें सरकार बचाने की उम्मीद है.
क्या है वो रास्ता?
- पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली में 342 सदस्य हैं. सरकार बनाने और गिराने के लिए 172 वोटों की जरूरत है.
- 172 वोट अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने के लिए भी चाहिए. चूंकि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष लेकर आया है, इसलिए उसे 172 वोट दिखाने होंगे.
- अगर 3 अप्रैल को विपक्ष 172 वोट से इस प्रस्ताव को पास नहीं करवा पाया तो इमरान की सरकार बच जाएगी.
इमरान खान की रणनीति क्या है?

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.









