
नेपाल चुनाव: 165 सीटों के लिए मैदान में 3500 उम्मीदवार, 5 मार्च को होगी वोटिंग
AajTak
नेपाल में आगामी आम चुनावों के लिए सरगर्मियां तेज हो गई हैं. प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के तहत 165 सीटों के लिए करीब 3,500 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है.
नेपाल के आगामी आम चुनाव के लिए मंगलवार को प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत 165 सीटों के लिए करीब 3,500 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं. चुनाव आयोग ने सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक नाम दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की, जिसमें 391 महिलाओं सहित कुल 3,428 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की है.
प्रतिनिधि सभा (HoR) की 275 सीटों के लिए यह चुनाव 5 मार्च को आयोजित किया जाएगा. भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर 'जेन-Z' समूह के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद पिछले साल 9 सितंबर को केपी शर्मा ओली के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने की वजह से ये चुनाव कराए जा रहे हैं.
मौजूदा वक्त में 73 वर्षीय सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल रही हैं, जिनकी सिफारिश पर राष्ट्रपति ने प्रतिनिधि सभा को भंग कर चुनावी तारीखों की घोषणा की थी.
सीटों का गणित और चुनावी प्रक्रिया
नेपाल की प्रतिनिधि सभा में कुल 275 सीटें हैं, जिनमें से 165 सीटों पर 'फर्स्ट पास्ट द पोस्ट' यानी सीधे मतदान के जरिए चुनाव होता है. बची 40 फीसदी यानी 110 सदस्यों का चयन आनुपातिक मतदान प्रणाली के जरिए किया जाता है. कार्यवाहक मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने उम्मीदवार पंजीकरण कार्यक्रम को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि देशभर में यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही. अब आयोग नामांकन पत्रों के सत्यापन और शिकायतों के निपटारे के बाद 23 जनवरी को उम्मीदवारों की अंतिम सूची प्रकाशित करेगा.
यह भी पढ़ें: नेपाल चुनाव में ओल्ड वर्सेज 'न्यू ब्लड', PM पोस्ट के लिए 35 साल के बालेन शाह ने दोगुने उम्र के नेता को दी चुनौती!

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में उथल-पुथल मची है. ट्रंप की मुश्किल ये है कि कुछ महीने बाद नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं. जिसे देखते हुए ट्रंप की पार्टी के ही लोग इकॉनमी पर उनसे ज्यादा ध्यान देने की मांग कर रहे हैं. तेल के दाम बढ़ने से अमेरिका में महंगाई भी धीरे धीरे बढ़ रही है. ऐसे में अगर ये युद्ध लंबा खिंचता है तो इससे ट्रंप की सियासी मुसीबत बढ़नी तय हैं. देखें वीडियो.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर से भी पहले से जंग चल रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार टीटीपी जैसे आतंकी समूहों को पनाह दे रही है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. लेकिन तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है. दोनों देशों का झगड़ना चीन के हितों के खिलाफ जा रहा है जिसे देखते हुए उसने एक प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने सामने से उसे खारिज कर दिया है.

भारत ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना भारतीय दूतावास की अनुमति और संपर्क के किसी भी जमीनी सीमा को पार करने की कोशिश न करें. दूतावास ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर लोगों को गंभीर लॉजिस्टिक और इमीग्रेशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. यह सलाह अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच जारी की गई है. दूतावास ने भारतीयों से आधिकारिक संपर्क में रहने और हेल्पलाइन नंबरों पर मदद लेने की अपील की है. दूतावास ने कहा, 'हमें बताए बिना ईरान न छोड़ें'. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 17वां दिन है. हर दिन बीतने के साथ ये जंग और भीषण होती जा रही है क्योंकि अब अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए ईरान ने एडवांस मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. 28 फरवरी से चल रहे युद्ध में ईरान ने पहली बार अपनी सबसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक सेजिल से इजरायल को टारगेट किया है. सेजिल मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है, इसी वजह से इसे डांसिंग मिसाइल भी कहा जाता है. ईरान की ओर से सेजिल मिसाइल का इस्तेमाल होने से युद्ध में और तेजी आने का साफ संकेत मिल रहा है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के शहर तेल अवीव पर मिसाइल हमला हुआ है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज में वो पल कैद हुआ है जब ईरान की मिसाइल तेल अवीव की एक सड़क पर आकर गिरती दिखाई देती है. इज़रायल पुलिस के मुताबिक इस हमले में क्लस्टर वारहेड का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरकर फटे और आसपास के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा. देखें वीडियो.

क्या ईरान युद्ध में अमेरिका फंस गया है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ट्रंप के लिए अब बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रंप दावे तो बहुत करते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि होर्मुज समुद्री मार्ग अभी भी बंद है. ईरान जिसे चाहता है उसके जहाज जाने देता है. बिना ईरान की सहमति के कोई जहाज वहां से नहीं निकल सकता. देखें श्वेता सिंह की ये रिपोर्ट.







